
मुंबई, 15 सितंबर (वार्ता) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई)o ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 55.1 प्रतिशत कर-पश्चात मुनाफा दर दर्ज किया है। इस प्रदर्शन के साथ एनएससी दुनिया के प्रमुख एक्सचेंजों में तीसरे स्थान पर आ गया है।
इस दौरान घरेलू प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का लाभ मार्जिन 48.3 प्रतिशत रहा, जो घरेलू बाजार में भी एनएसई की बढ़त बताता है।
राजस्व को लाभ में बदलने की एनएससी की क्षमता अधिकतर पश्चिमी देशों के प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी आगे है। जून 2026 को समाप्त हुई नवीनतम तिमाही में कर-पश्चात मुनाफा दर बढ़कर 59 प्रतिशत पहुंच गया है। यह रुझान दर्शाता है कि एनएसई की वर्तमान विकास दर वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों से भी अधिक तेज है।
लाभप्रदता में यह वृद्धि कारोबार के विस्तार के साथ हुई है, न कि उसकी कीमत पर। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच कुल आय 20.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी है। यह दर्शाता है कि मुनाफा दर में हुआ सुधार केवल लागत में कटौती का परिणाम नहीं है, बल्कि परिचालन दक्षता और व्यापार के बड़े पैमाने को भी दर्शाता है।
पूंजीगत दक्षता भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां करती है। एनएससी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 33 प्रतिशत का इक्विटी रिटर्न हासिल किया। इस दौरान एनएसई की बैलेंस शीट पूरी तरह कर्ज-मुक्त रही और उसके पास 68,198 करोड़ रुपये का ट्रेजरी निवेश मौजूद था, जो इसे उच्च लाभप्रदता और मजबूत वित्तीय सुरक्षा का दुर्लभ संतुलन प्रदान करता है।
शेयरधारकों को भी इस शानदार प्रदर्शन का बड़ा फायदा मिला है। प्रति शेयर लाभांश वित्तीय वर्ष 2023-24 के 18 रुपये से लगभग दोगुना होकर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 रुपये पर पहुंच गया है। इसी अवधि के दौरान लाभांश भुगतान अनुपात भी 54 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है।
इन सभी आंकड़ों को मिलाकर देखें तो ये एनएसई को न केवल भारत के सबसे बड़े एक्सचेंज के रूप में स्थापित करते हैं, बल्कि इसे दुनिया के सबसे कुशल और शेयरधारक-अनुकूल एक्सचेंज ऑपरेटरों में से एक बनाते हैं।
