क्षेत्र की प्यासी धरती को लेकर विधायक का भागीरथी प्रयास

सतना:जंगल, पहाड़ से आच्छादित भगवान राम की तपोभूमि की प्यासी धरती को पानीदार बनाने की पहल क्षेत्र के विधायक ने वर्षेां पहले शुरू की थी.इस कार्यकाल में भी उन्होने अपने इन प्रयासों को अमली जामा पहनाते हुए बारिश के पानी को रोकने के लिए अपने क्षेत्र में आधा दर्जन जलसंरचनाओं का पुर्ननिर्माण कराया है.सीमित बजट में आकार ले रही इन जल संरचनों में अभी कई किलोमीटर तक पानी रूका हुआ है.

रविवार चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने जिला मुख्यालय के मीडियाकर्मियों के एक दल को अपने क्षेत्र की नवनिर्मित जलसंरचनाओं का भ्रमण कराया.इसके पूर्व सर्किट हाउस में चर्चा करते हुए उन्होने बताया कि उनका परिवार मूलतया कृ षि पर आश्रित आधारित रहा है.इसके बाद राष्ट्रऋषि भारतरत्न नानाजी देशमुख के सम्पर्क में आए तो पानी का महत्व समझ में आया.बारिश का पानी यदि समय रहते रोक लिया जाए तो वह गरीबी,बेकारी में जीवन जी रहे लोगों की जीवन धारा ही बदल सकता है.

उन्होने बताया कि इसी सोच के साथ कार्ययोजना बनाकर हर पंचायत में एक जल संरचना बनाने का लक्ष्य लिया.शासन की योजनाओं के अंतर्गत जो कुछ भी सम्भव हो सका स्थलों की पहचान कर संरचना विकसित करने का काम शुरू हुआ.श्री गहरवार ने यह भी बताया कि इस बार हुई भारी बारिश ने बनाई गई जलसंरचनाओं को कुछ क्षति भी पहुचाई,इसके बावजूद उन इकाईयों में इतना पानी जमा हो गया है कि आने वाले आठ से दस महीने कहीं भी जल संकट की स्थिति पैदा नहीं होगी.पहले जिन क्षेत्रों में संरचनाएं बनाई गई हैं वहां माार्च के बाद पानी की किल्लत के चलते लोगों का पलायन शुरू हो जाता था.
आठवरही में बना तीन किलोमीटर लम्बा बांध
रैगांव और चित्रकूट विधानसभा से लगे आठवरही के छोटे तालाब का दायरा बढ़ाकर उसकी पार को लगभग एक किलोमीटर लम्बा कर दिया गया है.वन विभाग की सीमा में आने वाले इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लम्बाई में पानी का जमाव है.बताते हैं कि ऐसा तब हो पाया है जब पानी का जलस्तर बढऩे पर बांध के ऊपरी हिस्से को काट दिया गया है.
बाल्हा का तालाब
चितहरा से तकरीबन दस किलोमीटर अन्दर पूर्व से निर्मित बाल्हा के तालाब की मेड का विस्तार कर बांध का रूप दिया गया है.इस में जल भराव बढने से आसपास के आठ गांवों क ी पेयजल समस्या हमेंशा-हमेंशा के लिए समाप्त हो सकती है.विधायक श्री गहरवार ने बताया कि इसी से लगे फलाहारी सगरबाबा तालाब को भी नया रूप देकर उसके जलभराव क्षेत्र का विस्तार किया गया है.इस बार दोनों जल संरचनाओं में पानी अधिक आ जाने के कारण उसे एक ओर से काटने के लिए विवश होना पड़ा इसके बावजूद उसमें दस फीट पानी अभी भी जमा है.
पगारखुर्द के डुड़वा में दो जल संरचना
पहाड़ और जंगल के बीच पूर्व से निर्मित जल संरचना का विस्तार कर उसकी मेड़ को काफी ऊंचा किया गया है.साथ उसकी जल संग्रह क्षमता का भी विस्तार किया गया है.बताया गया है कि इस तालाब की गहराई को बढाया गया है.तालाब की मिट्टी को निकालकर पार में डाल दिया गया है.इससे पुराने जलसंग्रहण क्षेत्र में कई फीट की बढौत्तरी हो गई है

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