हरीश दुबे की रिपोर्ट ग्वालियर। महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात और देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेशोत्सव की धूम है। कहीं भव्य पंडाल सजे हैं, तो कहीं गणपति की विशाल प्रतिमाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। लेकिन गणेशोत्सव की इसी भव्य परंपरा के बीच ग्वालियर से जुड़ी एक खास कहानी भी सामने आती है।
बताया जाता है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जब ग्वालियर आए, तो यहां सिंधिया रियासत की ओर से आयोजित गणेशोत्सव की भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। ग्वालियर में गणेशोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए लोगों को एक साथ जोड़ने और सामाजिक चेतना जगाने की कोशिश भी की जाती थी।
इसी दौरान पुणे से आए कृष्णाजीपंत खासगीवाले भी ग्वालियर के गणेशोत्सव से प्रभावित हुए और उन्होंने इसकी जानकारी तिलक तक पहुंचाई। इसके बाद पुणे में सार्वजनिक गणेशोत्सव को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की पहल हुई… और धीरे-धीरे गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और जनजागरण का भी बड़ा माध्यम बन गया।
यानी आज देशभर में जिस गणेशोत्सव की भव्यता दिखाई देती है… उसकी ऐतिहासिक कहानी में ग्वालियर का नाम भी एक खास कड़ी के तौर पर सामने आता है।
