
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से यूजी नीट-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने वाले विद्यार्थियों पर लगाई गई ₹2 लाख की एग्जिट पेनल्टी तत्काल वापस लेने या स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे मेडिकल प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ा है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पटवारी ने कहा कि 3 सितंबर को जारी राउंड-2 के नोटिस में लगाया गया यह प्रावधान 3 अगस्त को जारी नियम पुस्तिका से विरोधाभासी है। नियम पुस्तिका के पृष्ठ 8 की धारा 15 में स्पष्ट किया गया था कि राउंड-2 तक आवंटित सीट से नाम वापस लेने वाले विद्यार्थियों को केवल प्रवेश शुल्क का भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने इन्हीं नियमों पर भरोसा करते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लिया था।
पटवारी ने निर्णय के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऑल इंडिया एमसीसी काउंसलिंग उस समय जारी थी। एमसीसी के राउंड-2 का सीट आवंटन 11 सितंबर को होना था, जबकि राज्य चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने 3-4 सितंबर को ही फ्री एग्जिट की अंतिम तिथि तय कर दी थी। ऐसे में विद्यार्थी अपग्रेडेशन की संभावनाओं की जानकारी के बिना निर्णय लेने को मजबूर हुए।
उन्होंने कहा कि एमसीसी व्यवस्था में राउंड-2 के बाद सामान्य वर्ग के विद्यार्थी के सीट छोड़ने पर अधिकतम आर्थिक नुकसान करीब ₹10,000 था, जबकि मध्यप्रदेश में ₹2 लाख की पेनल्टी असंगत रूप से अधिक है।
पटवारी ने सुप्रीम कोर्ट के एस. गुणसेकरन बनाम अंडर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट, 2024 INSC 1018 के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि विरोधाभासी काउंसलिंग प्रावधानों के कारण अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस करने, काउंसलिंग समाप्त होने तक विद्यार्थियों को सीट छोड़ने के लिए पर्याप्त समय देने और प्रक्रिया के बीच में नियम नहीं बदलने की मांग की।
