बहुध्रुवीय दुनिया के लिए वैश्विक संस्थाओं में जरूरी हैं सुधारः गुटेरेस

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में दुनिया के तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने का हवाला देते हुए वैश्विक संस्थाओं में बदलाव आवश्यक बताया।

श्री गुटेरेस ने रविवार को कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के हिसाब से खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा, “आज की आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताएं 1945 जैसी नहीं हैं।”

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है लेकिन इस बात पर जोर दिया कि इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और ब्रेटन वुड्स व्यवस्था सहित वैश्विक संस्थाओं में भी सुधार होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हम तेजी से एक बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए वैश्विक संस्थाओं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और ब्रेटन वुड्स व्यवस्था में सुधार की जरूरत है ताकि वे आज की दुनिया के अनुरूप हो सकें।” श्री गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की भी मांग की और कहा कि विकासशील देशों की धन तक अधिक पहुंच और वैश्विक आर्थिक फैसले लेने की प्रक्रिया में मजबूत आवाज की जरूरत है। उन्होंने विकास बैंकों से ‘बड़े, बेहतर और अधिक साहसी’ बनने का आग्रह किया और विकास पर केंद्रित कर्ज व्यवस्था और कर्ज से राहत के असरदार तरीकों की मांग की।

उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार किया जाना चाहिए ताकि फैसले लेने की प्रक्रियाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और प्रभाव बढ़े।” उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विकासशील देशों को अधिक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बहुध्रुवीय दुनिया के उभरने का भी समर्थन किया और कहा कि इससे एक मजबूत बहुपक्षीय व्यवस्था और भी जरूरी हो जाता है, कम नहीं। उन्होंने कहा, “सभी देशों को एक ऐसे बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए काम करना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर सभी के लिए काम करे।”

गौरतलब है कि ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन,दक्षिण अफ्रीका आदि) शिखर सम्मेलन में श्री गुटेरेस की बातें चार मुख्य प्राथमिकताओं पर केंद्रित थीं- विकास के लिए वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी और एआई के अंतर को कम करना, जलवायु न्याय हासिल करना और शांति को बढ़ावा देना।

श्री गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि एआई में तेजी से हो रही तरक्की विकास को तेज कर सकती है लेकिन अगर इसकी पहुंच कुछ ही कंपनियों और देशों तक सीमित रही तो यह मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता दशकों के विकास को कुछ ही वर्षों में समेट सकता है।” उन्होंने चेतावनी दी, “अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो एआई का अंतर आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में हर दूसरे अंतर को और बढ़ा देगा।” श्री गुटेरेस ने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे विकासशील देशों में एआई क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की पहलों का समर्थन करें, जिसमें कम्प्यूटर की क्षमता, आंकड़े और कौशल तक पहुंच बेहतर बनाने की कोशिशें शामिल हैं।

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