नई दिल्ली। कभी वैश्विक फैसलों पर पश्चिमी देशों का दबदबा था, लेकिन अब भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश दुनिया की नई ताकत बनकर उभर रहे हैं।
तेल, दुर्लभ खनिज, नए बाजार और सप्लाई चेन—इन सबकी जरूरत ने ग्लोबल साउथ की अहमियत बढ़ा दी है। यही वजह है कि अमेरिका, चीन, रूस और यूरोप, सभी इन देशों को अपने साथ जोड़ना चाहते हैं।
लेकिन ग्लोबल साउथ अब किसी एक खेमे का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों के हिसाब से फैसले ले रहा है। भारत इसका बड़ा उदाहरण है, जहां रूस के साथ रक्षा सहयोग, अमेरिका के साथ टेक्नोलॉजी साझेदारी और खाड़ी देशों के साथ व्यापार, सब साथ-साथ चल रहे हैं।
तो क्या दुनिया की ताकत का संतुलन बदल रहा है? और क्या ग्लोबल साउथ अब सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियमों को प्रभावित करने वाला खिलाड़ी बन चुका हैं |
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