राज्यसभा सांसद का पता नहीं मिलने के कारण नहीं हो पाया नोटिस सर्व, दूसरे ने लेने से किया इंकार

जबलपुर। राज्यसभा सदस्य का नामांकन निरस्त किये जाने को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस बी पी शर्मा की एकलपीठ को बताया गया कि सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया। इसके अलावा सांसद महेश केवट के नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

गौरतलब है कि कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर की गयी चुनाव याचिका में कहा गया था कि तेलंगाना की एक अदालत में महिला द्वारा दायर व्यक्तिगत परिवाद में उन्हें प्रतिवादी बनाया था। प्रतिवादी बनाये जाने के कारण न्यायालय ने उनके पक्ष के लिए नोटिस जारी किया था। उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस दर्ज या विचाराधीन था। उनके नामांकन पर आपत्ति प्रस्तुत किये जाने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विपरीत जल्दबाजी में न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी छुपाने के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया। उन्होंने सुनवाई के दौरान रिटर्निंग अधिकारी को बताया था कि परिवाद में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है,सिर्फ औपचारिक तौर पर उन्हें अनावेदक बनाया गया है।

रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा उनका नामांकन नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त किया गया है। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। याचिका में मध्य प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल, महेश केवट, केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग को अनावेदक बनाया गया है।

याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि सांसद तरुण चुघ को भेजी गयी याचिका की कॉपी पढ़ने लायक नहीं है। सांसद रजनीश अग्रवाल का पता नहीं मिलने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया है। सांसद महेश केवट ने नोटिस स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके अलावा केन्द्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त, रिटर्निंग अधिकारी प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश विधान सभा तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज्य चुनाव आयोग की तरफ से याचिका से उनका नाम विलोपित किये जाने की मांग करते हुए आवेदन पेश किया। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सांसद रजनीश अग्रवाल के द्वारा चुनाव आयोग में दिये गये फार्म के पते पर नोटिस सर्व किया गया था।

एकलपीठ ने अपने आदेश में सांसद तरुण चुघ को पिटिशन की कॉपी तथा दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से भेजने के निर्देश याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को दिये। सांसद रजनीश अग्रवाल को आरएडी मोड से नोटिस भेजे। सांसद महेश केवट को भेजा गया नोटिस सर्व हुआ माना जाये और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक अवसर प्रदान किया जाता है। नाम हटाने के लिए दायर आवेदन पर याचिकाकर्ता अपना जवाब पेश करें।

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