
शहडोल। चांद और मंगल तक पहुंचने के दावे करने वाले आधुनिक भारत में शहडोल जिले के आदिवासी अंचल से विकास के दावों को आईना दिखाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां सड़क के अभाव में एक बुजुर्ग महिला का शव घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा। आखेटपुर वार्ड नंबर-1 के डाला टोला में सामने आई इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने जिले में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार डाला टोला निवासी 70 वर्षीय श्याम कली पटेल लंबे समय से बीमार थीं। उनका स्थानीय स्तर पर उपचार चलने के साथ नागपुर में भी इलाज कराया जा रहा था। इलाज के दौरान नागपुर में उनकी मौत हो गई। शनिवार सुबह उनका शव एंबुलेंस से गांव पहुंचा, लेकिन घर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस करीब एक किलोमीटर पहले ही रुक गई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों के सामने शव को घर तक पहुंचाने के लिए बैलगाड़ी का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। ग्रामीणों ने शव को बैलगाड़ी में रखा और कच्चे रास्ते से करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर उसे घर तक पहुंचाया। 21वीं सदी में सामने आई यह तस्वीर सरकारी विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
राजनीतिक दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
शहडोल जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं और लोकसभा सीट भी भाजपा के पास है। इसके बावजूद दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि इस मामले में अब तक किसी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, विपक्ष और स्थानीय राजनीतिक संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जनहित से जुड़े ऐसे मुद्दे लगातार सामने आने के बावजूद इन्हें प्रभावी ढंग से क्यों नहीं उठाया जा रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शहडोल के दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को आज भी सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा? बैलगाड़ी से शव ले जाने की यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल है।
सालों से सड़क की मांग, आश्वासन के बाद भी नहीं बदले हालात
ग्रामीणों का कहना है कि डाला टोला में पक्की सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन दिए गए और समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका। ग्रामीणों के मुताबिक हर बार सड़क बनवाने का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी होती है, लेकिन बीमारी, दुर्घटना या मौत जैसी आपात स्थिति में समस्या और गंभीर हो जाती है। एंबुलेंस का घर तक नहीं पहुंच पाना इसी बदहाल व्यवस्था का उदाहरण है।
