दूषित-अनियमित जलापूर्ति से बिफरे पार्षदों ने घेरा फिल्टर प्लांट

सतना, नगर निगम द्वारा पिछले कई वर्षों सेतमाम आधुनिक संसाधनों की उपलब्धतता को तरह-तरह की तकनीकी शब्दावली में लपेटकर यह बताने का प्रयास किया जाता रहा है कि शहर में जल प्रदाय व्यवस्था शुद्ध और नियमित रहती है. लेकिन वास्तविकता यह है कि पानी का पूरा बिल भरने के बावजूद भी एक ओर जहां शहर के विभिन्न क्षेत्रों के रहवासी दूषित पेयजल का सेवन करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति अब भी दूर की कौड़ी बनी हुई है. इसी कड़ी में समस्या के निराकरण के बजाए केवल थोथे दावों से भरी कार्यशैली से बिफरे पार्षदों ने शुक्रवार को न सिर्फ फिल्टर प्लांट का घेराव किया बल्कि ज्ञापन सौंपते हुए कड़ी चेतावनी भी दे दी.

शहर सहित जिले भर में पिछले तकरीबन महीने भर से रुक रुक कर जारी वर्षा के क्रम के चलते सारे जलाशय लबालब भरने के बाद बहते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद भी पिछले कुछ दिनों से शहर में जल प्रदाय व्यवस्था लडख़ड़ाई हुई है. शहर के कुछ इलाकों में जहां नल सूखे हुए हैं वहीं कुछ इलाकों में दूषित मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है. इस बारे में ननि की जलप्रदाय शाखा के जिम्मेदारों का कहना है कि एनीकट में दो पंप खराब हो जाने के कारण जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है. जिसमें सुधार करते हुए पानी की सप्लाई को नियमित करने का प्रयास जारी है. लेकिन वहीं दूसरी ओर दूषित पानी की सप्लाई के मामले में जिम्मेदार या तो मानने को तैयार नहीं होते, या फिर चुप्पी साधते नजर आते हैं. लिहाजा विकास के तमाम दावों के बावजूद भी पेयजल आपूिर्त जैसी आधारभूत व्यवस्था में लगातार खामी ने पार्षदों को आंदोलित कर दिया. पार्षदों द्वारा पहले तो जिम्मेदारों को समस्या से अवगत कराया. लेकिन जब हालत नहीं सुधरे तो शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष मिथिलेश सिंह, पार्षद अमित अवस्थी और श्रीमती मीना माधव के नेतृत्व में डेढ़ दर्जन से अधिक पार्षदों का समूह शहर की रीवा रोड पर स्थित फिल्टर प्लांट पर पहुंच गया. जहां के मुख्य द्वार के सामने घेराव करते हुए धरना देना शुरु कर दिया. मामले का काबिलेगौर पहलू यह भी रहा कि ननि की कार्यशैली के विरोध में धरना देने वालों में पक्ष और विपक्ष दोनों पार्षद सम्मिलित रहे. धरना देने के बाद पार्षदों के समूह द्वारा निगमायुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन को कार्यपालन यंत्री मुकेश चतुर्वेदी और प्रभारी कार्यपालन यंत्री राहुल पटेल को सौंपा. ज्ञापन सौंपने के साथ ही पार्षदों द्वारा यह चेतावनी भी दी गई कि यदि अगले कुछ दिनों में जलप्रदाय व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो फिर वे निगमायुक्त के आवास के सामने अनिश्चतकालीन धरना देने के लिए बाध्य हो जाएंगे.

क्या मिला आश्वासन..?

ननि के दोनों कार्यपालन यंत्रियों ने पार्षदों को बताया कि एनीकट में खराब चल रहे पंप को दुरुस्त कर लिया गया और दूसरे का सुधार कार्य जारी है. जिसके चलते 13 सितंबर से शहर में नियमित जलापूर्ति शुरु कर दी जाएगी. दूषित पेयजल के मामले में रसायन की एकेएस यूनिवर्सिटी में जांच कराई जाएगी. स्क्वाडा सिस्टम के पैरामीटर और जांच के पैरामीटर में अंतर के चलते गलत रीडिंग आने के मामले को संज्ञान में लेकर सेंसर्स को ठीक कराया जाएगा. निजी कंपनी की बेपरवाह कार्यशैली के मामले में जांच कमेटी गठित होगी. गलती पाए जाने पर ठेका निरस्त कर दिया जाएगा.

लगाई कड़ी फटकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर योगेश ताम्रकार और निगमायुक्त डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा फिल्टर प्लांट पहुंच गए. जानकारी तलब करने पर वहां पर मौजूद स्टॉफ और ठेका कर्मियों ने बताया कि एनीकट से फिल्टर प्लांट की सप्लाई शुरु हो चुकी है. जिसके चलते शाम तक जलापूर्ति शुरु होने की संभावना है. वही पुराने घिसे पिटे जवाब को सुनकर महापौर और निगमायुक्त दोनों स्वयं को रोक नहीं सके और कड़ी फटकार लगानी शुरु कर दी. इस दौरान महापौर ने सख्त लहजे में यह चेतावनी भी दे दी कि यदि यही रवैया बना रहा तो टर्मिनेशन की कार्रवाई से नहीं हिचकेंगे. हलांकि मौजूद स्टॉफ सिर झुकाकर फटकार सुनता रहा लेकिन इसका असर कितनी देर तक बरकरार रह पाएगा, यह आने वाले समय में मालुम होगा.

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