मुंबई, वैश्विक मोर्चे पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बीच आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे युद्ध जैसे हालातों के कारण ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछलकर 108.27 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट पैदा हो गया है। इस दोहरे झटके के चलते बीएसई सेंसेक्स 593.43 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,309.16 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स भी 207.50 अंक टूटकर 23,270.30 पर आ गया।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों ने निकाले पैसे, मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा मंदी
कच्चे तेल की महंगाई के अलावा अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 4.96 प्रतिशत के करीब पहुंचने से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने घरेलू बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी है, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है। आज के शुरुआती कारोबार में मेटल, रियल्टी, बैंकिंग और ऑटो समेत लगभग सभी सेक्टर्स लाल निशान में खुले, जहां निफ्टी मेटल में 2.46% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एशिया के अन्य प्रमुख बाजार जैसे जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी भारी दबाव में कारोबार करते नजर आए।
बाजार में चौतरफा मंदी के बीच आईपीओ बाजार को लेकर निवेशकों का उत्साह बरकरार, आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका
एक तरफ जहां सेकेंडरी बाजार में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू प्राथमिक बाजार (IPO Market) को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आगामी 17 सितंबर को खुलने वाले देश के सबसे बड़े एनएसई आईपीओ के प्रति निवेशकों की रुचि के चलते तरलता का रुख उस ओर भी डायवर्ट हो रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते, तब तक घरेलू शेयर बाजार में उच्च स्तरों पर उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।

