अहमदाबाद, अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स ने टेमासेक, ब्लैकरॉक, अल्फा वेव ग्लोबल और प्रेमजी इन्वेस्ट जैसे दिग्गजों से 1 अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) की नई इक्विटी कैपिटल जुटाकर एक नया मुकाम हासिल किया है। इस नए निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-इन्वेस्टमेंट इक्विटी वैल्यूएशन बढ़कर करीब 19 अरब डॉलर हो गया है। इसके साथ ही कंपनी फ्रांस की ग्रुप एडीपी और भारत की जीएमआर एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ते हुए स्पेन की एना और थाईलैंड के एयरपोर्ट्स ऑफ थाईलैंड के बाद दुनिया की तीसरी सबसे वैल्यूएबल एयरपोर्ट ऑपरेटर बन गई है।
तीन चरणों में पूरा होगा निवेश सौदा, एयरपोर्ट नेटवर्क के आधुनिकीकरण और पैसेंजर क्षमता विस्तार पर खर्च होगी राशि
आधिकारिक बयान के मुताबिक, निवेशकों का यह समूह तीन अलग-अलग चरणों में कंपनी के नए शेयर खरीदेगा, जिसके बाद उनके पास अडानी एयरपोर्ट्स की लगभग 5.54 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी और यह प्रक्रिया जुलाई 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है। जुटाई गई इस नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी अपने मौजूदा आठों एयरपोर्ट्स के मॉडर्नाइजेशन, पैसेंजर कैपेसिटी बढ़ाने और टर्मिनल सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए करेगी। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य अपने नेटवर्क के जरिए सालाना यात्री क्षमता को 20 करोड़ (200 मिलियन) तक पहुंचाना और कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।
भारतीय एविएशन सेक्टर में मजबूत पकड़, देश के कुल एयर पैसेंजर ट्रैफिक का 25 प्रतिशत हिस्सा संभालती है कंपनी
वर्तमान में मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत आठ प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करने वाली अडानी एयरपोर्ट्स भारत के कुल एयर पैसेंजर ट्रैफिक का 25 प्रतिशत और एयर कार्गो ट्रैफिक का करीब 33 प्रतिशत हिस्सा अकेले हैंडल करती है। हालांकि यात्रियों की संख्या के लिहाज से जीएमआर अभी आगे है, लेकिन वैल्यूएशन के मामले में अडानी एयरपोर्ट्स की इस छलांग ने वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर का दबदबा कायम किया है, जिससे देश के एविएशन सेक्टर में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

