
जबलपुर। जिला पंचायत सभागार में लगभग छह महीने के लंबे अंतराल के बाद जिला शिक्षा समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की शुरुआत से ही समिति के सदस्यों में लंबे समय बाद बैठक बुलाए जाने को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। चर्चा के दौरान शिक्षा विभाग और डीपीसी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों तथा स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर सदस्यों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जिससे बैठक का माहौल काफी गरमा गया।
बच्चों के पानी लाने को व्यवस्था मानने पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान जब शिक्षा विभाग और डीपीसी की ओर से दावा किया गया कि जिले के लगभग 100 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल और शौचालय की पूर्ण व्यवस्था है, तो सदस्यों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि जो बच्चे अपने घर से पानी की बोतल लेकर स्कूल आते हैं, उसे भी स्कूल की पेयजल व्यवस्था पूर्ण ही माना जाएगा। अधिकारियों के इस अजीबो-गरीब जवाब से जिला पंचायत उपाध्यक्ष व समिति सभापति विवेक पटेल, सदस्य एडवोकेट इंद्र कुमार पटेल और सतेंद्र सिंह राजपूत ने गहरी नाराजगी जताई। सदस्यों का कहना था कि कागजों में झूठे आंकड़े प्रस्तुत करके पूरे सदन को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
इमारतें जर्जर,शौचालयों की स्थिति भी बदहाल
समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि धरातल पर स्कूलों की स्थिति बेहद खराब और दयनीय है। जिले के कई स्कूलों की इमारतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और शौचालयों की स्थिति भी बदहाल है। इसके अलावा कई स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ता है और वह मजबूरन अपने घर से पानी की बोतलें लेकर स्कूल पहुंचते हैं। इसके साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया, जिस पर विभाग कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहा है।
गलत आंकड़ों के विरोध में बैठक का बहिष्कार
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी विवेक गौतम और डीपीसी सहित अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। सदस्यों ने स्पष्ट किया कि जब तक अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर निरीक्षण नहीं करते और वास्तविक सुधार नहीं लाते, तब तक ऐसे कागजी दावों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के जवाबों से असंतुष्ट होकर और गलत आंकड़ों के विरोध में नाराज समिति सभापति विवेक पटेल ने बैठक का पूर्ण बहिष्कार कर दिया।
