ढाका, 09 सितंबर (वार्ता) बंगलादेश में खसरे के प्रकोप और खसरे जैसे लक्षणों वाली संदिग्ध बीमारियों से मरने वालों की आधिकारिक संख्या बुधवार को 1,000 के पार पहुंच गयी। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में तीन और लोगों की मौत हुई।
कुल मृतक संख्या अब 1,002 हो गयी है। इनमें प्रयोगशाला जांच में खसरे की पुष्टि वाले 100 मरीज और खसरे जैसे लक्षणों वाले 902 मरीज शामिल हैं।
डीजीएचएस के अनुसार, पिछले 24 घंटे में खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के 1,188 नए मामले सामने आए, जिससे 15 मार्च से अब तक दर्ज मामलों की संख्या करीब 1.87 लाख हो गयी है।
इस अवधि में कुल 1,034 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिससे अब तक अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 1,47,393 हो गयी है। इनमें से 1,41,819 मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि बुधवार सुबह तक 5,574 मरीज अस्पतालों में भर्ती थे।
बंगलादेश मार्च से खसरे के अभूतपूर्व प्रकोप का सामना कर रहा है। संक्रमण पर काबू पाने के लिए अप्रैल और मई में सरकार द्वारा आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाये जाने समेत व्यापक प्रयासों के बावजूद संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, जिससे देश के स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव पड़ा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मार्च में खसरे से संबंधित मौतों और संक्रमण के मामलों की औपचारिक निगरानी शुरू की थी और तब से आंकड़ों में लगातार वृद्धि हुई है।
डीजीएचएस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के 19,904 मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हुई है, जबकि संदिग्ध मामलों की संख्या 1,67,580 हो गयी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस महामारी का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ा है और कुल संक्रमण के 82 प्रतिशत मामले पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में हैं। नियमित टीकाकरण के लिए अभी बहुत छोटे नौ महीने से कम उम्र के शिशुओं में करीब 33 प्रतिशत मामले सामने आये हैं।
राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के बावजूद यह प्रकोप बंगलादेश में दशकों की सबसे घातक खसरा महामारी बन गया है और देश के सभी जिलों में फैल चुका है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण में तेजी का संबंध टीकाकरण कवरेज में लगातार बनी कमियों, टीके की पूरी खुराक नहीं लेने वाले बच्चों में घटती प्रतिरोधक क्षमता, टीका लगवाने वाले बच्चों में कुपोषण और संक्रमण को सीमित करने के लिए जरूरी आबादी स्तर की प्रतिरोधक क्षमता हासिल नहीं कर पाने से है।
खसरा खांसने और छींकने से आसानी से फैलता है और संक्रमण को ठीक करने के लिए कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। मस्तिष्क में सूजन और सांस लेने में गंभीर कठिनाई जैसी जटिलताएं मरीज की स्थिति को तेजी से बिगाड़ सकती हैं। छोटे बच्चे इसके सबसे अधिक संवेदनशील समूह हैं, हालांकि किसी भी उम्र का व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।
