नई दिल्ली, भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भी अपनी मजबूत रफ्तार बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है, जहां जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद जताई गई है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा आर्थिक झटका नहीं लगता है, तो निवेश और निर्यात में हो रही तेज बढ़ोतरी घरेलू उपभोग में संभावित नरमी और नीतिगत प्रोत्साहनों के घटते प्रभाव की पूरी भरपाई कर देगी।
कॉर्पोरेट कैपेक्स में 11% की जोरदार तेजी का अनुमान, बिजली क्षेत्र बनेगा सबसे बड़ा चालक
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसमें निवेश और निर्यात दोनों में लगभग 12 प्रतिशत की शानदार वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि बीएसई-500 कंपनियों का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) वित्त वर्ष 2026-27 में 11 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जिसमें अकेले बिजली क्षेत्र कुल अतिरिक्त निवेश का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा योगदान कर सकता है।
महंगाई और उच्च ब्याज दरों के बीच नॉमिनल जीडीपी 12% से अधिक रहने की संभावना
आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेतों के बावजूद, लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति और कमोडिटी की ऊंची कीमतों के चलते ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले समय में अपने रुख को कड़ा कर सकता है, जिससे कुल मिलाकर नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 12 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है।

