आमिर खान
टीकमगढ़: नगर पालिका टीकमगढ़ के निर्वाचित अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 7 अप्रैल 2026 को जारी उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जिसके तहत अब्दुल गफ्फार को नगर पालिका अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था।कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक अब्दुल गफ्फार को टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष के पद पर कार्य करने दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
13 आरोपों में से 9 पाए गए थे सिद्ध
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि अब्दुल गफ्फार के खिलाफ कुल 13 आरोप लगाए गए थे, जिनमें से 9 आरोप सिद्ध पाए गए थे। हालांकि, हाईकोर्ट के समक्ष यह दलील दी गई कि जिन मामलों में अनियमितताएं बताई गईं, वे नगर पालिका की प्रेसिडेंट इन काउंसिल यानी P.I.C. के सामूहिक निर्णय थे। अब्दुल गफ्फार ने व्यक्तिगत रूप से टेंडर तैयार करने, निविदाओं का मूल्यांकन करने, एजेंसी चयन या कार्यों के क्रियान्वयन में भूमिका नहीं निभाई थी।
कोर्ट ने कहा—पूरी सुनवाई का अवसर जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि अब्दुल गफ्फार को प्रारंभिक जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने शो-कॉज नोटिस में लगाए गए आरोपों से इनकार किया था, इसके बाद मामले में विस्तृत जांच की जानी चाहिए थी। कोर्ट ने माना कि उन्हें आरोपों का खंडन करने के लिए पूर्ण अवसर नहीं मिला।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को पद से हटाना गंभीर कदम है और ऐसी कार्रवाई गंभीर एवं असाधारण परिस्थितियों में ही की जानी चाहिए। केवल मामूली अनियमितताओं के आधार पर धारा 41-A के तहत निर्वाचित अध्यक्ष को हटाना उचित नहीं माना जा सकता।
₹20.83 लाख जमा करने का भी था आदेश
राज्य सरकार के 7 अप्रैल के आदेश में अब्दुल गफ्फार को नगर पालिका को कथित वित्तीय नुकसान के तौर पर 20 लाख 83 हजार रुपये जमा करने का निर्देश भी दिया गया था।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद टीकमगढ़ नगर पालिका की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। फिलहाल अब्दुल गफ्फार को अगली सुनवाई तक नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का रास्ता साफ हो गया है।
