ग्वालियर: ग्वालियर से भोपाल तक शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान यात्रियों को पानी की बोतलें उपलब्ध कराए जाने को लेकर भाजपा नेता शुभम चौधरी ने पर्यावरण से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यात्रियों को पानी उपलब्ध कराना जरूरी सुविधा है, लेकिन इसके लिए हर यात्री तक पहुंचने वाली सिंगल यूज़ प्लास्टिक बोतल के विकल्प पर भी विचार होना चाहिए।चौधरी ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार रेलवे में प्रतिदिन करीब 13 लाख लीटर रेल नीर की आपूर्ति होती है। 500 मिलीलीटर की बोतल के हिसाब से यह लगभग 26 लाख बोतलों के बराबर है। इसके अलावा अन्य स्वीकृत ब्रांडों की बोतलें भी इस्तेमाल होती हैं। ऐसे में रेलवे में प्लास्टिक कचरे को कम करना बड़ी चुनौती है।
उनका सुझाव है कि रेलवे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ कचरा पैदा होने की मात्रा कम करने पर भी ध्यान दे। स्टेशनों पर विकसित की जा रही जल शुद्धिकरण व्यवस्थाओं की तर्ज पर प्रमुख ट्रेनों में सुरक्षित और गुणवत्ता-निगरानी वाले वाटर रिफिल पॉइंट बनाए जा सकते हैं, जहां यात्री अपनी पुनः उपयोग योग्य बोतल भर सकें।
शुभम चौधरी ने रेलवे से ‘रिफिल, नोट प्लास्टिक’ जैसे पायलट मॉडल पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि यात्रियों को पानी चाहिए, लेकिन हर यात्रा के साथ नई प्लास्टिक बोतल जरूरी नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, स्वच्छ रेलवे की दिशा में अगला कदम केवल कचरा साफ करना नहीं, बल्कि कचरा कम पैदा करना भी होना चाहिए।
