नई दिल्ली, आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले ईरान ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करवाने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयासों को तेज कर दिया है। हालांकि, ब्रिक्स समूह के भीतर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं, क्योंकि यूएई ने ईरान द्वारा पड़ोसी देशों पर किए गए हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे समूह के साझा घोषणा पत्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
मई की बैठक में भी नहीं बन पाई थी आम सहमति, एससीओ और ब्रिक्स की स्थिति में अंतर
इससे पहले मई महीने में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी ईरान और अन्य सदस्य देशों के बीच तीखा गतिरोध देखने को मिला था, जिसके चलते कोई भी संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था। हालांकि ईरान ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर अमेरिकी हमलों के खिलाफ संयुक्त घोषणा पत्र हासिल करने में सफलता पाई थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि यूएई की मौजूदगी के कारण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऐसी कूटनीतिक जीत हासिल करना ईरान के लिए बेहद कठिन चुनौती होगी।
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
भारत की मेजबानी में 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई दिग्गज नेता हिस्सा लेने वाले हैं। अमेरिका द्वारा शुरू किए गए आर्थिक प्रतिबंधों और हालिया सैन्य संघर्षों के कारण बाधित हो रही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के इस दौर में, ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच ईरान के इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना और आपसी मतभेदों को सुलझाना एक बड़ी परीक्षा साबित होगा।

