जबलपुर: खजरी खिरिया निवासी रामराज पटेल और उनकी पत्नी वंदना पटेल के जुड़वा नवजातों की मौत के मामले में चिकित्सा लापरवाही की गंभीर परतें सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट में आईवीएफ उपचार से लेकर प्रसव और नवजात देखभाल तक कई स्तरों पर गंभीर चूक उजागर हुई है। बावजूद इसके अब तक किसी भी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार में आक्रोश बना हुआ है।
ब्लड ग्रुप की गलत मान्यता बनी बड़ी वजह
जांच में पाया गया कि वंदना पटेल के ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी लापरवाही बरती गई। वर्ष 2022 और 2024 में इंदिरा आईवीएफ सेंटर में हुई जांचों में ब्लड ग्रुप अलग-अलग (एबी पॉजिटिव और एबी निगेटिव) दर्ज किया गया, लेकिन उपचार एबी पॉजिटिव मानकर किया गया। इस गंभीर त्रुटि के कारण जरूरी एंटी – डी इंजेक्शन नहीं लगाया गया और “अप्रत्यक्ष कूम्ब्स परीक्षण” भी नहीं किया गया, जो प्रोटोकॉल के अनुसार अनिवार्य था।
प्रसव के दौरान भी नहीं बरती गई सावधानी
17 सितंबर 2025 को ऑपरेशन के माध्यम से दोनों बच्चों का जन्म हुआ। आरोप है कि डॉ. सोनल द्वारा मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं ली गई, जबकि दस्तावेज पहले से उपलब्ध थे। जन्म के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने के संकेत मिलने के बावजूद समय पर आवश्यक परीक्षण और उपचार नहीं किया गया।
पीलिया के लक्षणों को किया गया नजरअंदाज
परिजनों के अनुसार, जन्म के कुछ ही घंटों बाद बच्चों में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे थे। कई बार जानकारी देने के बावजूद डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और केवल धूप में रखने की सलाह दी। 24 घंटे तक कोई ब्लड टेस्ट नहीं कराया गया। जब स्थिति गंभीर हुई, तब जांच में बिलीरुबिन का स्तर अत्यधिक पाया गया, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
रेफरल में देरी, बिगड़ती गई स्थिति
हालत बिगड़ने पर दोनों नवजातों को पहले गैलेक्सी अस्पताल और फिर नागपुर के किम्स अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। एक बच्चे की 19 सितंबर को और दूसरे की 20 सितंबर 2025 को मौत हो गई।
समय पर भी नहीं मिला ईलाज
जांच समिति ने इसे “आरएच असंगति” का स्पष्ट मामला बताया है, जिसमें समय पर सही इलाज और निगरानी न मिलने के कारण नवजातों की जान चली गई। रिपोर्ट में डॉ. शुभाली शर्मा, डॉ. सोनल, डॉ. नंदन शर्मा और पैथोलॉजी से जुड़ी डॉ. पूजा जैन सहित संबंधित चिकित्सा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं।
13 साल बाद आई खुशियां मातम में बदलीं
रामराज पटेल के अनुसार, शादी के 13 वर्षों बाद 17 सितंबर 2025 को उनके घर जुड़वा पुत्रों का जन्म हुआ था। जन्म के समय दोनों बच्चे स्वस्थ बताए गए थे और परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन कुछ ही घंटों में हालात बदल गए और यह खुशी गहरे मातम में तब्दील हो गई।
न्याय की आस में भटकता परिवार
गंभीर लापरवाही उजागर होने और जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और सवाल उठा रहा है कि आखिर जिम्मेदारों को कब जवाबदेह ठहराया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके
