सतना : शहर में कई महीनों से पीने के पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. पूरे शहर में नलों के माध्यम से गंदे और दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस शुद्धिकरण और जलापूर्ति का जिम्मा गुजरात की ‘कृष्णा कंपनी’ को करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ सौंपा गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कंपनी पानी को साफ़ करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है.
उस वक्त बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इस आधुनिक प्रोजेक्ट के बाद शहर में पानी की किल्लत और शुद्धता की शिकायतें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी. लेकिन वर्तमान में घरों के नलों से आ रहा मटमैला और बदबूदार पानी साफ गवाही दे रहा है कि वॉटर फिल्टरेशन प्लांट सिर्फ कागजों पर चल रहा था.
फिलहाल फिल्टर प्लांट के टैंकों की सफाई कर उनमें नई बालू (फ़िल्टर सैंड) डालने की प्रक्रिया शुरू है, ताकि पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया सुचारू हो सके.
सफाई कार्य में धीमा होने से स्थानीय नागरिकों ने चिंता जाहिर की है शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी ठेकेदार कंपनी की अनदेखी के कारण लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया गया जिस पर नगर निगम प्रशासन को कठोर रुख अपनाना चाहिए.
