
ओंकारेश्वर। ज्योतिर्लिंग ओंकार जी महाराज सोमवार दोपहर 2.00 बजे मंदिर से चांदी की पालकी में सवार होकर ओंकार पर्वत की परिक्रमा के भ्रमण के लिए निकले। 51 ढोल के साथ हजारों भक्त नाचते-गाते और भोले शंभू-भोलेनाथ का उद्घोष करते हुए चल रहे थे।मंदिर से पालकी शंकराचार्य चौक होकर कोटी तीर्थ घाट पहुंची, जहां संक्षिप्त पूजा-आरती की गई। उसके पश्चात पालकी पुराने मार्केट से होकर संगम घाट पर पहुंची। पूरे मार्केट को सजाया गया था। राम मंदिर के सामने चक्र तीर्थ भक्त मंडल द्वारा महा आरती की गई। संगम घाट तक पूरे मार्ग में गुलाल और गुलाब की बौछार होती रही।
संगम घाट पर विद्वान पंडित राजेश्वर दीक्षित के नेतृत्व में विद्वान पंडितों द्वारा नर्मदा और कावेरी के पवित्र संगम के मध्य ज्योतिर्लिंग ओंकार जी महाराज की पंचमुखी प्रतिमा का महा अभिषेक पूजन संपन्न कराया गया। दूध, दही, शहद, घी, शक्कर पंचामृत से स्नान कराया गया और नर्मदा-कावेरी के पवित्र जल से भी स्नान कराया गया। इस अवसर पर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक दृष्टि राव पुष्पेंद्र सिंह जी और साधु-संत उपस्थित थे।संगम घाट से पालकी ऋण मुक्तेश्वर महादेव, राधा कृष्ण मंदिर होते हुए गौरी सोमनाथ पहुंची। गौरी सोमनाथ से शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची मूर्ति के समीप से होते हुए सीता रसोई, चांद सूरज गेट और सिद्धनाथ महादेव मंदिर के सामने से होकर भेरूघाट पुल से होते हुए रात्रि 10.00 बजे वापस मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचकर ओंकार जी महाराज की महा आरती की गई।पूरे परिक्रमा मार्ग में साधु-संतों के आश्रमों एवं भक्तगणों द्वारा फलाहारी प्रसाद, फल और पेय पदार्थों का वितरण किया गया। इस अवसर पर इंद्र देवता ने भी बारिश कर ओंकार जी महाराज का स्वागत किया। इस अवसर पर हजारों भक्त उपस्थित थे।
