समान क्षेत्रफल वाले विश्व मानचित्र के पक्ष में भारत, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर कोई समझौता नहीं

नई दिल्ली 06 सितंबर (वार्ता) भारत ने समान क्षेत्रफल वाले विश्व मानचित्र पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इससे संबंधित प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है और वह इसका समर्थन करता है लेकिन उसके संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को वह स्वीकार नहीं करेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि भारत ने चार सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिसका उद्देश्य दुनिया के महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को अपेक्षाकृत सही तरीके से दिखाने वाले बराबर क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। प्रस्ताव का शीर्षक , “मानचित्र को सही करना: वैश्विक मानचित्रण में संतुलन स्थापित करना और विश्व के क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका, का समान एवं न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना ” है।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने मतदान के साथ अपने स्पष्टीकरण में साफ किया कि उसने प्रस्ताव के मूल सिद्धांत-बराबर क्षेत्रफल के आधार पर दुनिया के नक्शे को अधिक संतुलित तरीके से दिखाने का समर्थन किया है। भारत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव को किसी खास विश्व मानचित्र, मानचित्र बनाने की किसी विशेष पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण की मंजूरी नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव किसी विशेष विश्व मानचित्र को अपनाता या प्रमाणित नहीं करता। इसमें राजनीतिक नक्शानवीसी से जुड़े मुद्दे, जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, विवादित क्षेत्र या स्थानों के नाम भी शामिल नहीं हैं।
भारत ने विशेष रूप से कहा कि भारत के संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। भारत के अनुसार, देश के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है।
भारत ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसका रुख स्पष्ट ,लगातार एक जैसा है और इसमें कोई बदलाव नहीं है।

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