
रीवा। संजय गांधी अस्पताल हर दिन कोई का कोई कांड करने का गढ़ बन गया है। शनिवार को एक जिंदा व्यक्ति को मुर्दा बनाकर अंतिम संस्कार के लिए डाक्टरों ने परिजनों को सुपुर्द कर दिया था। इस बार तो एक कदम डॉक्टर और आगे बढ़ गए हैं। एक युवक की जान जोखिम में डाल दी थी। वह कुत्ता काटने से पीडि़त हुआ था। रेबीज का इजेक्शन लगवाने पहुंचा था। उसे स्नेक बाइट का इंजेक्शन लगा दिया गया।
युवक का नाम आयुष सिंह पिता अंशुमान सिंह18 वर्ष है। यह रामपुर कोठी झिरिया थाना सिविल लाइन के रहने वाले हैं। इन्हें 5 सितंबर की शाम करीब 5 बजे कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ता काटने के बाद वह पीडि़त हालत मे किसी तरह संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने शाम 5.39 बजे पर्ची कटवाई और फिर कैजुअल्टी पहुंचे। यहां पर कैजुअल्टी में पीजी ही मौजूद थे। यहां महिला पीजी छात्र थी। उन्होंने पर्चा देखा और बिना कुछ सोचे ही स्नेक बाइट का इंजेक्शन लगा दिया। युवक को लगा कि उसे कुत्ता काटने का ही इंजेक्शन लगाया गया है। वह निश्चित होकर घर पहुंच गया। जब उसने घर के लोगों को पर्ची दिखाई तो उसमें स्नेक बाइट लिखा था। उसके होश ही उड़ गए। वह वापस से फिर अस्पताल पहुंचा। शाम करीब 7.30 बजे फिर नई पर्ची डॉग बाइट की कटवाई और दोबारा कैजुअल्टी पहुंचा। वहां डॉक्टर को पूरी कहानी बनाई। तब उन्होंने सुधार किया और कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगाया
रीवा के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा है। एक दिन पहले एक जिंदा आदमी को मुर्दा बना दिया था। वहीं दूसरे ही दिन फिर से इलाज में कोताही बरती गई। इससे यह तो साफ है कि संजय गांधी अस्पताल में इलाज कराना यानि मौत को गले लगाने जैसा है।
युवक ने कहा बताया था फिर गलत इंजेक्शन लगा दिए
आयुष सिंह ने बताया कि उन्होंने अस्पताल में कैजुअल्टी में महिला चिकित्सक को डाग बाइट की जानकारी दी थी। इसके बाद भी उन्होंने स्नेक बाइट का इंजेक्शन लगा दिया। घर पहुंचने के बाद दोबारा अस्पताल पहुंचा फिर डॉग बाइट का इंजेक्शन लगाया गया।
