
बालाघाट, आजादी के 80 बरस बाद भी बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लोग बुनियादी सुविधाओं से जूझते नजर आ रहे हैं । यह जनप्रतिनिधियों की उदासीनता है या फिर सिस्टम की लापरवाही, जिसने आज भी भोले भाले आदिवासियों तक बुनियादी सुविधाओं को पंहुचाना जरूरी नहीं समझा । ग्रामीणों के द्वारा कई बार अधिकारी कर्मचारियों का ध्यानाकर्षण कराया गया । आवेदन निवेदन भी किया गया , किन्तु जवाबदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया । आलम यह कि 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां की बिजली व्यवस्था को बहाल नहीं किया जा सका है ।
गांव में बिजली के पोल, लेकिन करंट नहीं
आदिवासी बाहुल्य बैहर क्षेत्र में प्रशासनिक अमले की उदासीनता और जिम्मेदारों की अनदेखी की हद हो गई । यहां ग्राम पंचायत बिठली अंतर्गत आने वाले ग्राम दुगलई में विगत 12 वर्षों से बिजली गुल है । पहाड़ियों के बीच घिरा यह आदिवासी बाहुल्य ग्राम आज भी बिजली का मोहताज बना हुआ है । गांव में कहने को बिजली के पोल लगे हुए हैं. लेकिन घरों में बल्ब जलाने के लिए बिजली का करंट नहीं पंहुच रहा ।
शिकायतों के बाद भी अधिकारी नहीं ले रहे सुध
ग्रामीणों का आरोप है कि, बीते सालों के दौरान कई शिकायतों के बाद भी कर्मचारी गांव तक नहीं पंहुच पाए हैं ,न ही उनकी समस्या के लिए उनकी सुध ली गई । जिसके कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश भी है और वे इस समस्या से काफी परेशान भी हैं । बिजली विभाग की लचर व्यवस्था के कारण गांव में लगे बिजली के पोल अब इधर उधर लुढ़कते नजर आ रहे हैं । वहीं, तार जगह-जगह से टूटे नजर आ रहे हैं। यहां निवासरत कुछ ग्रामीण किसी तरह टॉर्च की रोशनी से अपना गुजारा करते हैं तो कुछ अंधेरे में रात काटने को मजबूर रहते हैं ।
ज्ञात हो कि घने जंगलों के बीच बसा यह दुगलई गांव ग्राम पंचायत बिठली से तकरीबन 17 किलोमीटर दूर है । यहां के ग्रामीण अपनी पंचायत तक पंहुचने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं, वहीं भयंकर जंगल के कारण देर शाम से पहले ही वापस होना उनकी मजबूरी होती हैं । दूरस्थ वनांचल ग्राम दुगलई में 34 मकान हैं और यहां की जनसंख्या तकरीबन 450 के आसपास है । दूरस्थ घने जंगलों में बसे इस गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी अधिकांश लोगों को नहीं मिल पाया है, जिसके कारण आज भी यहां पर लोग झोपड़ियों में ही गुजर बसर कर रहे हैं ।
टॉर्च की रोशनी ग्रामीणों का सहारा
इसके अलावा आजीविका के लिए वे पूरी तरह जंगलों पर ही निर्भर रहते हैं, जहां से वनोपज संग्रहण कर किसी तरह अपना भरण पोषण कर पाते हैं । यहां निवासरत ग्रामीण ज्ञानसिंह ने दुखी मन से कहा कि, ”बिजली के अभाव में टॉर्च की रोशनी ही उनका सहारा होती है. लेकिन टॉर्च और मोबाइल को चार्ज करने के लिए रोजाना दूसरे गांव जाना पड़ता है । दिन में दूसरे गांव से चार्जिंग के बाद रात में टॉर्च की रोशनी ही उन्हें राहत प्रदान करती है । उन्होंने बताया कि, ”गर्मी या ठण्डी के दिनों में तो वे आसानी से दूसरे गांव जाकर चार्ज कर लेते हैं, किन्तु बारिश के दिनों में उनके लिए भयंकर समस्या उत्पन्न हो जाती है ।
लाइन न होने से बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
ग्रामीण सुखराम ने बताया कि, “बिजली नही होने से टॉर्च जलाकर खाना खाते हैं, लेकिन उजाला नही होने के कारण बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं । स्कूल में गुरुजी के साथ जितना पढ़ पाते हैं, उसके बाद रात में घर में बिल्कुल नही पढ़ पाते, बिजली नहीं होने से बहुत परेशानी होती है ।
गांव तक बिजली के पोल पंहुचने के बाद इतने लंबे अरसे से यहां पर लोग बिजली के लिए तरस रहे हैं ।बिजली के अभाव के कारण लोग शाम के बाद अपने अपने घरों में दुबक जाते हैं । वहीं घर में टॉर्च की रोशनी से किसी तरह अपना काम चलाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि टॉर्च की रोशनी उनके लिए पर्याप्त नहीं होती है, क्योंकि जंगली इलाका होने के कारण यहां पर खतरनाक वन्यजीवों के साथ साथ जहरीले जीव जंतुओं का भी खतरा बना रहता है ।
ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच रूपलाल मेरावी ने बताया कि, ”दुगलई गांव में बिजली की समस्या को लेकर कई बार अधिकारी कर्मचारियों को शिकायत की गई । किन्तु विभाग के द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. जिसके कारण टॉर्च जलाकर किसी तरह लोग अपना काम चला रहे हैं. यहां पर लगभग 12 सालों से बिजली गुल है ।
जल्दी बिजली बहाल का आश्वासन
विद्युत विभाग के जे ई वीरेन्द्र सिंह उईके ने बताया कि, ”दुगलई जंगल के अंदर बसा गांव हैं. यहां के खम्भे मे लगे हुए विद्युत के तार दो बार चोरी हो चुके हैं । दोबारा तार लगाने के लिए स्टीमेट तैयार किये गए हैं । जल्द ही तार लगाने का काम अधिकारियों के निर्देशन में किया जाएगा।
इस पूरे मामले पर ने नवागत एसडीएम अनीकेत शांडिल्य ने कहा कि, ”आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है, वे तत्काल संबंधित विभाग से संपर्क कर शीघ्र बिजली व्यवस्था को बहाल करवायेंगे ।”
