सतना: केन्द्रीय जेल सतना में भगवान “श्रीकृष्ण का प्रकटोत्सव समारोह हर्ष उल्लास से मनाया गया। यह कार्यक्रम मानस पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी रामललाचार्य महाराज मानस पीठ खजुरीताल मैहर के सानिध्य में एवं विधायक विक्रम सिंह रामपुर बाघेलान, योगेश ताम्रकार महापौर के आतिथ्य में आयोजित हुआ।
महापौर योगेश ताम्रकार सपत्नी इस समारोह में सम्मिलित रहे व इस कार्यक्रम में श्रीमती ममता पाण्डेय पूर्व महापौर भी उपस्थित रही। भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव में कृष्णा पाण्डेय शैलेन्द्र त्रिपाठी, विनय त्रिपाठी सहित सतना शहर के अन्य समाज सेवी सम्मिलित हुए।
जगद्गुरु रामललाचार्य को सम्मान व श्रद्धा एवं पुष्पों की बारिश के साथ कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। जेल अधीक्षक श्रीमती लीना कोष्टा, जेल उप अधीक्षक श्रीकांत त्रिपाठी, जेल उप अधीक्षक सोनबीर सिंह कुशवाह एवं अन्य जेल स्टॉफ व समाज सेवी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना की गई। एवं जगद्गुरू श्री रामललाचार्य जी व उनके चरण पादुका का पूजन कर एवं पुष्प गुच्छ भेट कर स्वागत किया गया।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव अवसर पर जगद्गुरू रामललाचार्य महाराज द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की कथा श्रवण कराई, उनके जीवन वृतांत से शिक्षा व प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया। महाराज द्वारा अपने उद्बोधन में कहा कि प्राचीन काल से ही न केवल भारत में अपितु विश्व के अन्य विविध देशों में श्रीकृष्ण अराधना विविध रूपों में देखने को मिलती है। छान्दोग्य उपनिषद में वर्णन आता है कि श्रीकृष्ण ने तत्वदर्शन की शिक्षा अंगिरा ऋषि तथा मार्शल आर्ट की शिक्षा, संदीपनी ऋषि से प्राप्त की है। आज के परिप्रेक्ष्य में श्रीकृष्ण जीवन प्रबंध, नेतृत्व प्रेरणा और हर परिस्थिति में मुस्काराते रहने की अवधारणा प्रासंगिक है। महाराज जी द्वारा सकारात्मक जीवन जीने हेतु प्रेरित किया गया। उन्होंने बंदियों से कहा की सभी बंदीगण भगवान के नाम का जप अवश्य करें यह जप संख्या जब एक करोड से ऊपर हो जाएगी तो, जीवन का उद्धार हो जायेगा। जप करने से निश्चित ही आपके जीवन के कष्ट कम होंगे।
इस कार्यक्रम में पधारे जगद्गुरू व उपस्थित अतिथियों का जेल अधीक्षक श्रीमती लीना कोष्टा द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
बंदियों ने किया नाट्य का मंचन
बंदी पात्रों द्वारा नाट्य का मंचन किया गया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को दर्शाया गया। बंदियों ने कंस, देवकी, वासुदेव, नारदजी, द्वारपाल की भूमिका सजीव अभिनीत की। इस नाट्य की सभी लोगों द्वारा प्रशंसा की गई। इस दौरान जेल का वातावरण भगवान श्रीकृष्णमय हो गया। स्वागतम कृष्णा, शरणागत कृष्णा गीत गायन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होने पर बधाई एवं सोहर गीत गाये गये। भक्तों द्वारा नृत्य भी किया गया।
