इंदौर: साइबर ठगी के लिए बैंक खातों की खरीद फरोख्त का मामला सामने आया है. परदेशीपुरा पुलिस की जांच में एक खाता 2 हजार रुपए में खुलवाने के बाद 5 हजार और फिर 10 हजार रुपए में बेचे जाने की जानकारी सामने आई है.गृह मंत्रालय के आई4सी पोर्टल पर दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों के विश्लेषण के दौरान केनरा बैंक नंदनगर शाखा का एक संदिग्ध खाता पुलिस के सामने आया. जांच में खाते का संबंध उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से मिला.
पुलिस ने खाताधारक मोनीश उर्फ मोनू मंडलोई से पूछताछ की. उसने बताया कि दोस्त पियूष कुशवाह के कहने पर 2 हजार रुपए के बदले खाता खुलवाकर उसकी पूरी बैंकिंग किट उसे दे दी थी. पियूष ने किट ऋषि पवार को 5 हजार रुपए में बेच दी. इसके बाद ऋषि ने इसे रॉनी उर्फ रूपेश मंगरोलिया को 10 हजार रुपए में दिया. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रूपेश मंगरोलिया लोगों को यूएसडीटी को भारतीय रुपए में बदलने का झांसा देता था. इसके बाद ठगी की रकम इन खातों में मंगवाई जाती थी. मामले में सुजल सोनी की भूमिका भी सामने आई है. परदेशीपुरा पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों में से चार को हिरासत में लिया है. मुख्य आरोपी रॉनी उर्फ रूपेश मंगरोलिया की तलाश की जा रही है. मामले में प्रकरण दर्ज किया है.
4 आरोपी हिरासत में, अन्य की तलाश जारी,
डीसीपी जोन-2, अमन सिंह राठौर ने नव भारत को बताया कि म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क की जांच की जा रही है. मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लिया है. फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम लगातार प्रयास कर रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.
