
जबलपुर। हाईकोर्ट ने भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के सामने बने फ्लाईओवर के रखरखाव को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सवाल किया कि जब संबंधित काम ठेकेदार की जिम्मेदारी में शामिल है और वह इसे बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के करने के लिए बाध्य है, तो सरकार इसके लिए 4.69 करोड़ रुपये का नया टेंडर क्यों जारी कर रही है।
हाईकोर्ट ने फ्लाईओवर निर्माण करने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही रखरखाव के लिए जारी 4.69 करोड़ रुपये के नए टेंडर की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता ठेकेदार को निर्देश दिए कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को अपनी जिम्मेदारी के तहत दूर करे और अगली सुनवाई में इसकी रिपोर्ट पेश करे।
ऐसे कामों के लिए पैसा है, स्कूल-स्वास्थ्य केंद्र के लिए नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे कामों के लिए सरकार के पास पैसा है, लेकिन जब स्कूल भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कोर्ट भवन के निर्माण की बात आती है तो पैसे की कमी बताई जाती है। हाईकोर्ट में वीवायएससी इन्फ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और अधिवक्ता रोहित शर्मा ने बताया कि उनकी कंपनी ने हबीबगंज स्टेशन के सामने फ्लाईओवर का निर्माण किया है।
राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने 30 जुलाई को फ्लाईओवर का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में कुछ कमियां सामने आने पर ठेकेदार को तीन दिन में उन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसके अगले ही दिन एक अगस्त को उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दे दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करना ठेकेदार की रखरखाव अवधि की जिम्मेदारी में शामिल है। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग ने इन्हीं कार्यों के लिए 469 लाख रुपये यानी करीब 4.69 करोड़ रुपये का नया रखरखाव टेंडर जारी कर दिया। याचिकाकर्ता ने इसी कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
