मुंबई, नवी मुंबई एयरपोर्ट 300 एकड़ में देश की पहली AI सिटी बनेगी। 11 अरब डॉलर निवेश वाली परियोजना में AI डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और GCC विकसित होंगे।
महाराष्ट्र सरकार ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 300 एकड़ में प्रस्तावित देश की पहली एआई इनोवेशन सिटी को तेजी से विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 11 अरब डॉलर के निवेश वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सरकार समयबद्ध रोडमैप तैयार कर रही है। इस इनोवेशन सिटी में बड़े पैमाने पर एआई डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) विकसित किए जाएंगे।
यह जानकारी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार (निवेश एवं रणनीति) कौस्तुभ धवसे ने गुरुवार को मुंबई के जियो कन्वेंशन सेंटर में नरेडको के 6वें रियल एस्टेट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टर्स समिट में दी।
महाराष्ट्र डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र
कौस्तुभ धवसे ने कहा कि महाराष्ट्र ने जिस स्तर का बुनियादी ढांचा तैयार किया है, उससे मुंबई और राज्य को विकास के अगले चरण में ले जाने का बड़ा अवसर पैदा हुआ है। धवसे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में मुंबई में हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भविष्य की आर्थिक वृद्धि का आधार तैयार कर रहा है।
इस बदलाव में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके मुताबिक, देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है। इससे राज्य की स्थिति देश के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में मजबूत हुई है।
महाराष्ट्र में 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
नरेडको महाराष्ट्र के इस समिट में राज्य सरकार की ओर से भरोसा देते हुए कहा गया कि सरकार एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक प्रतिभा और संस्थागत ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही है। इसके तहत नए विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य सुविधाओं और ज्ञान संस्थानों के विकास की योजना है। राज्य में 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई इनोवेशन रीजन विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
समिट में दिग्गजों की मौजूदगी
इस समिट के उद्घाटन समारोह में कौस्तुभ धवसे के साथ अडानी एंटरप्राइजेज के निदेश प्रणव अडानी, नरेडको इंडिया के चेयरमैन डॉ. निरंजन हिरानंदानी, रेमंड रियल्टी के चेयरमैन गौतम सिंघानिया, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, एनएमआरडीए के मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर संजय मुख़र्जी,नरेडको इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष राजन बांदेलकर, एसबीआई की सीजीएम एवं रियल एस्टेट प्रमुख भुवनेश्वरी ए, नरेडको महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर, नरेडको महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष संदीप रुनवाल सहित जाने माने विकासक,निवेशक उपस्थित थे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट मिलकर बनाएंगे नए आर्थिक केंद्र
समिट में अडानी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अडानी ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को अगले विकास चरण का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट का बेहतर तालमेल नए आर्थिक केंद्रों और उभरते सिटी कॉरिडोर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘मुंबई 3.0’ से बदलेगा महानगरीय क्षेत्र
नरेडको इंडिया के चेयरमैन डॉ. निरंजन हिरानंदानी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ मुंबई महानगरीय क्षेत्र में नए विकास केंद्र उभर रहे हैं। उन्होंने ‘मुंबई 3.0’ को एमएमआर के पुनर्गठन का बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि इससे आवासीय, वाणिज्यिक, लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी
रेमंड रियल्टी के चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने कहा कि भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने संस्थागत पूंजी बढ़ाने, शुरुआती विकास लागत के लिए आसान वित्तपोषण, किराये के आवास के लिए विशेष नीति, जीएसटी में तर्कसंगतता और शहरी पुनर्विकास में तेजी की जरूरत बताई।
मुंबई में सोशल इंफ्रा का माहौल
नरेडको महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा कि मुंबई का पुनर्विकास केवल अलग-अलग परियोजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ पर्याप्त भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा विकसित कर पूर्ण और रहने योग्य समुदाय तैयार करना जरूरी है।
समिट में महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा
रौनक ग्रुप के एमडी एवं नरेडको के पूर्व नेशनल वाइस प्रेसिडेंट राजन बांदेलकर ने कहा कि सीएम देवेंद्र फडणवीस की दूरदर्शी नीतियों के तहत राज्य में मुंबई एमएमआर के साथ अन्य शहरों में भी इंफ्रा विकास के साथ निवेश की संभावना काफी बढ़ गई है।
REIIS 2026 में वैकल्पिक पूंजी, सीमा-पार निवेश, शहरी पुनर्विकास, रियल एस्टेट लिक्विडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस, एआई और प्रॉपटेक जैसे मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। समिट का प्रमुख संदेश रहा कि भारत के अगले विकास चक्र को केवल निर्माण गतिविधियों से गति नहीं दी जा सकती। इसके लिए दीर्घकालिक पूंजी, स्थिर नीतियां, तेज क्रियान्वयन, तकनीक, कुशल मानव संसाधन और टिकाऊ शहरी नियोजन का मजबूत समन्वय जरूरी होगा।
