
सीधी। महिलाओं ने पुत्र और परिवार की सुख समृद्धि के लिए आज निर्जला उपवास कर कांस, कुसा और झड़बेरी से बनी हरछठ की पूजा की। ग्रामीण क्षेत्रों में हरछठ के व्रत को लेकर ज्यादा उत्साह देखा जाता है। यहां व्रत की तैयारियां महिलाओं द्वारा एक पखवाड़े पूर्व से ही शुरू कर दी जाती है।
हरछठ के पूजन में ऐसी सामग्रियां लगती हैं जिसकी तैयारी के लिए महिलाओं द्वारा पहले से ही अपनी सक्रियता शुरू कर दी जाती है। शहरी क्षेत्रों में भी हरछठ के व्रत को लेकर कई दिनों पहले से ही बाजारों में रौनक दिखाई देने लगती है। व्रत को लेकर महिलाएं सुबह से तैयारी में जुट गई थी। घर में सफाई कर घर को शुद्ध कर दोपहर में पूजा अर्चना शुरु किया। हर साल भादो की छठी तिथि को हरछठ मनाई जाती है। महिलाएं अपने पुत्रों के दीर्घायु होने और उन्हें असामयिक मौत से बचाने के लिए हरछठ की पूजा करती हैं। जिले में यह पूजा वही महिलाओं ने किया जिनके पुत्र हैं। महिलाओं ने एक बेटे पर मिट्टी के एक दर्जन कुंढ़वा में सात प्रकार के भुने अनाज भरकर पूजा की। किंवदंती है कि हरछठ की पूजा कर पुत्र दीर्घायु होते है और उन्हें असामयिक मौत से बचाया जा सकता है, इसी चाह में महिलाएं सदियों से यह पूजा करती आई है। अधिकतर हिन्दू महिलाओं ने मंदिरों व घरों में पूजा कर बेटे के लम्बी उम्र के लिए व्रत रखा। महिलाओं द्वारा मिट्टी के एक दर्जन कुंढ़वा में सात प्रकार के भुने अनाज भरकर पूजा की गयी।
किसानों ने भी इस पूजा को विशेष रुप से किया। किसान परिवार द्वारा हरछठ बनाने में कांस-कुसा, छूल की डाल और झड़बेरी का इस्तेमाल किया गया। इस पूजा में खास बात यह रही महिलाओं ने दिन भर खेत में पैर नहीं रखा। जहां फसल पैदा होनी हो और न ही व्रत के बाद किए जाने वाले पारण में अनाज से बना भोजन खाया गया। किसान परिवार में पूजा खत्म होने के बाद घर की माताएं पूजा के लिए बनाए गए तालाब से अमृत रूपी जल से बच्चों का मुंह धुलवाई। उसमें कपड़ा भिगोकर उनकी पीठ पर आशीर्वाद भरा पोता मारा गया। धारणा है कि श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इस दिन उनके साथ उनके अस्त्र, हल व बैल की भी पूजा की गई थी।
बाजार में महंगे दामों में बिके फल
हरछठ व्रत पर फलों की मांग अचानक बढ़ गई थी। पूजा में फलों की विशेष आवश्यकता होने के कारण महिलाओं ने इनकी खरीदी मंहगे दामों में की। जो केला एक सप्ताह पूर्व तक 40-50 रूपये दर्जन मिल रहे थे आज 70 रूपये दर्जन तक बिके। वहीं सेवों की कीमत 100-120 रूपये एवं अनार 120 रूपये तक बिके। चर्चा के दौरान कुछ फल विक्रेताओं का कहना था कि त्यौहारी सीजन का दौर शुरू हो जाने के कारण दामों में अभी मांग के अनुसार उछाल बना रहेगा। हरछठ व्रत में भैंस के दूध की मांग सर्वाधिक रही। यह दूध पड़वा की मां का होने की अनिवार्यता के चलते महिलायें दूध एवं दही की व्यवस्था बनाने के लिये परेशान दिखीं। वहीं बाजार में आज हरछठ पर पड़वा की मां के दूध की मांग जोरों से रही। यह अवश्य रहा कि विक्रेता कमाई करने के लिये धोखाधड़ी करने से बाज नहीं आये।
