
इंदौर. गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से मिले डेटा की तस्दीक में इंदौर से जुड़े फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा हुआ है. शहर के 49 संदिग्ध सिम विक्रेताओं व पीओएस धारकों से जुड़ी 151 सिम का इस्तेमाल देश के अलग अलग राज्यों और शहरों में दर्ज 212 वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों में मिला. एमआईजी पुलिस ने चार आरोपियों पर केस दर्ज कर एक को गिरफ्तार किया है.
ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत जांच में सामने आया कि सिम आर्थिक लालच में एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाई गई. सिम विक्रेता रोहित दलवे ने 15 मार्च को राजेश चौधरी के नाम पर सिम जारी की थी. राजेश ने 200 रुपए लेकर सिम भगवानदास उर्फ नाना को दी. भगवानदास ने करीब 500 रुपए लेकर इसे हिमांशु जुनवाल को और हिमांशु ने आशीष शर्मा को सौंप दिया. बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया. आरोपियों ने फोन पर लोगों को कम कीमत में थोक जींस पैंट उपलब्ध कराने और फ्रेंचाइजी देने का झांसा दिया. उत्तर प्रदेश के खीरी में रहने वाले अनील कुमार गुप्ता से 30 हजार रुपए में फ्रेंचाइजी देने का झांसा देकर 10 हजार रुपए ऐंठे लिए. इसके बाद गुप्ता ने 27 मई को एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत की थी. मामले में पुलिस ने राजेश चौधरी को गिरफ्तार किया है. जबकि भगवानदास उर्फ नाना जुनवाल, हिमांशु उर्फ रोहित जुनवाल और आशीष शर्मा की तलाश जारी है. पुलिस अब सिम से जुड़े मोबाइल नंबर, खातों और 212 शिकायतों में आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है. मामले में थाना प्रभारी चंद्रभाल सिंह ने बताया कि आई 4 सी से प्राप्त डेटा की तस्दीक के दौरान संदिग्ध सिम का नेटवर्क सामने आया है. सिम को आर्थिक लाभ के लिए आगे बढ़ाने की कड़ी और इससे जुड़े अन्य साइबर अपराधों की जांच की जा रही है.
ऐसे करते थे साइबर ठगी…
आरोपी फर्जी सिम से लोगों को फोन कर कम कीमत में थोक जींस पैंट उपलब्ध कराने का झांसा देते थे. साथ ही 30 हजार में जींस पैंट के थोक कारोबार की फ्रेंचाइजी देने का ऑफर दिया जाता था. यूपी के खीरी निवासी अनील कुमार गुप्ता से फ्रेंचाइजी के नाम पर 10 हजार लेने के बाद न फ्रेंचाइजी दी और न सामान. गुप्ता ने 27 मई 2026 को एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।
फर्जी सिम मामले में दूसरी कार्रवाई…
इंदौर पुलिस की ओर से फर्जी सिम से जुड़े मामले में यह दूसरी कार्रवाई बताई जा रही है. क्राइम ब्रांच की तकनीकी जांच में इन सिम से 100 से ज्यादा लोगों से संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन नंबरों का इस्तेमाल किन लोगों से संपर्क करने और किस तरह के लेनदेन में किया.
