आउटर पर ट्रेनों के खड़े होने की समस्या में आई कमी 

जबलपुर। जबलपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए तीन महत्वपूर्ण इंटरसिटी ट्रेनों का टर्मिनल मदन महल किए जाने का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। 17 अगस्त से जबलपुर-सिंगरौली, जबलपुर-रीवा और जबलपुर-अंबिकापुर इंटरसिटी का संचालन मदन महल स्टेशन से शुरू होने के बाद मुख्य स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर परिचालन का दबाव कम हुआ है। रेलवे के इस बदलाव से खासतौर पर प्लेटफॉर्म नंबर 3 और 4 पर दिनभर खड़े रहने वाली खाली रेक की समस्या में कमी आई है। तीनों ट्रेनों का मुख्य टर्मिनल अब मदन महल है, हालांकि यात्रियों की सुविधा के लिए इनका ठहराव जबलपुर स्टेशन पर भी रखा गया है। पहले जहां प्लेटफॉर्म खाली रेक से घिरे रहते थे, वहीं अब इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दूसरी ट्रेनों के परिचालन के लिए आसानी से किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में भी दिखाई दे रहा है। पहले प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कई ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता था, जिससे यात्रियों को परेशानी होती थी और ट्रेनें अनावश्यक रूप से विलंबित भी होती थीं। अब तीन इंटरसिटी के टर्मिनल को मदन महल स्थानांतरित किए जाने से मुख्य स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की उपलब्धता बढ़ी है और आउटर पर ट्रेनों को रोकने की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम हुई है।

यात्रियों को मिल रहा फायदा 

रेलवे की यह पहल केवल परिचालन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर यात्रियों की सुविधा पर भी पड़ रहा है। मुख्य स्टेशन पर प्लेटफॉर्म खाली रहने से ट्रेनों के आने-जाने के लिए जगह बेहतर तरीके से उपलब्ध हो रही है और लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर रेक खड़े रहने की स्थिति कम हुई है। खासकर व्यस्त समय में इसका फायदा ज्यादा दिखाई दे सकता है। पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा किए गए इस बदलाव को स्टेशन की क्षमता का बेहतर उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एक सवाल अभी भी बरकरार 

तीनों इंटरसिटी का टर्मिनल मदन महल करने से मुख्य स्टेशन का दबाव तो घटा है, लेकिन मदन महल से जबलपुर के बीच इन ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अब भी अपेक्षाकृत कम नजर आती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन ट्रेनों के अधिकांश यात्री जबलपुर मुख्य स्टेशन से ही सवार होते रहे हैं। ऐसे में ट्रेन के मदन महल से रवाना होने के बाद जब वह कुछ ही मिनट में जबलपुर स्टेशन पहुंचती है, तब यहां बड़ी संख्या में यात्री सवार होते हैं। सिंगरौली इंटरसिटी के मामले में मदन महल से रवाना होने के बाद जबलपुर में उसका निर्धारित ठहराव भी है।

यानी टर्मिनल बदलने से रेलवे को प्लेटफॉर्म और परिचालन के मोर्चे पर राहत जरूर मिली है, लेकिन यात्रियों की पहली पसंद अब भी मुख्य जबलपुर स्टेशन बना हुआ है। यदि मदन महल से ही पर्याप्त संख्या में यात्री ट्रेनों में सवार होने लगें तो इस व्यवस्था का दोहरा लाभ हो सकता है—मुख्य स्टेशन का दबाव और कम होगा तथा मदन महल स्टेशन का टर्मिनल के रूप में वास्तविक उपयोग भी बढ़ेगा। फिलहाल रेलवे की इस सधी हुई पहल ने मुख्य स्टेशन की व्यस्तता को कम करने की दिशा में सकारात्मक असर दिखाना शुरू कर दिया है।

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