1,000 कैमरों को लगाने वाली फाइल खा रही धूल

जबलपुर। बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के साथ अपराधियों की धरपकड़, चालानी कार्यवाही में सीसीटीव्ही कैमरे की अहम भूमिका होती है। जिले में सीसीटीवी कैमरा की संख्या को और बढ़ाने के लिए चार माह पूर्व मुख्यालय प्रस्ताव भेजा गया था। नई लोकेशन पर 1000 कैमरे और लगाए जाने की डिमांड की गई थी लेकिन यह प्रस्ताव वहां धूल खा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को और चाक-चौबंद करने वाला कैमरों का प्रस्ताव मुख्यालय में धूल फांक रहा है।

वर्तमान में शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में लगे कैमरे कई बार तकनीकी खराबी या कम संख्या के कारण नाकाफी साबित हो रहे हैं। अपराध के बदलते तरीकों के बीच पुलिस को सर्विलांस सिस्टम मजबूत करने की सख्त जरूरत है। शातिर अपराधियों के भागने वाले रास्तों को ट्रैक करने और चेन स्नैचिंग, लूट एवं चोरी अन्य वारदातों को रोकने और आरोपियों की पहचान के लिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर हाईटेक कैमरे लगाना बेहद जरूरी है। जिस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है यदि ये कैमरे समय पर मिल जाते, तो न केवल ट्रैफिक मॉनिटरिंग और ई-चालान की कार्रवाई में तेजी आती, बल्कि शहर के ब्लैक स्पॉट्स को भी सुरक्षित घेरे में लिया जा सकता था लेकिन इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदारों की नींद कब टूटती है और धूल खा रहे इस जरूरी प्रस्ताव को कब हरी झंडी मिलती है।

ठप्प या फुटेज धुंधले

पुलिस की तीसरी आंख कहे जाने वाले सीसीटीव्ही कैमरे कई बार धोखा दे देते है अपराधियों की शिनाख्तगी में अहम रोल निभाने वाले सीसीटीव्ही कैमरे कई स्थानों पर या तो ठप्प पड़े है या उनके फुटेज धुंधले आ रहे है। जिसके चलते कई मामलो में अपराधी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है । ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था, जलसा जुलूस और अपराधों की रियल टाइम निगरानी नहीं हो पाती है। कैमरों का मेंटिनेन्स पुलिस का रेडियो विभाग ठेका कम्पनी के माध्यम कराता है। इन कैमरों के कई बार बंद होने के कारण कई स्थानों पर लाइव लोकेशन पुलिस कंट्रोल रूम को नहीं मिल पाती है।

अभी 615 कैमरों से होती है निगरानी

शहर में 615 कैमरों से निगरानी होती है। इन कैमरों की निगरानी सीधे कंट्रोल रूम से की जाती है। सूत्रों की माने तो हर दिन 10 से 20 प्रतिशत कैमरे ठप्प हो जाते है। तकनीकी खराबी आने से कैमरे बंद हो जाते है ऐसे में बंद पड़े क्षेत्र में अपराध हो जाए तो आरोपी की शिनाख्ती में पुलिस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बंद पड़े कैमरों को समय पर सुधारा भी नहीं जाता है इस ओर न तो ठेका कंपनी ध्यान देती है और नहीं अफसर इस ओर ध्यान दे रहे है।

ऐसी लोकेशन पर लगने हैं कैमरे

जिले में सीसीटीवी कैमरों की संख्या में और इजाफा किया था। इसके अलावा कई ऐसे भी इलाके है जहां रात में सडक़े सूनी हो जाती है वहां कैमरे लगते थे। साथ ही जहां महिलाओं संबंधित अपराध बढ़े है या जिन लोकेशन से महिलाओं को अधिक आवागमन होता है एवं जहां महिलाओं की संख्या अधिक है ऐसी लोकशन भी चिन्हित की गई थी जहां कैमरे लगने है।

इनका कहना है

मई माह में लगभग 1000 नए कैमरे लगाने का प्रस्ताव भोपाल भेजा गया था। इस पर मुख्यालय स्तर पर काम चल रहा है।

एस.एन इक्का, सीसीटीव्ही प्रभारी

Next Post

पैरोल से फरार हुआ बंदी, हत्या, अपहरण, लूट प्रकरण में काट रहा था सजा

Thu Sep 3 , 2026
जबलपुर। हत्या, अपहरण, लूट मामले में सजा काट रहा बंदी पैरोल अवधि पूरी होने पर जेल नहीं लौटा। मामले में सिविल लाइन पुलिस ने दण्डित बंदी, जमानतदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस के मुताबिक बुधवार को राजकुमार दास 59 वर्ष निवासी जेल लाईन सिविल लाईन ने लिखित […]

You May Like