
जबलपुर। हाईकोर्ट ने शहडोल जिले में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की फांसी का फंदा खोल दिया है, लेकिन उसकी जिंदगी सलाखों में कैद कर दी है। न्यायालय ने फांसी की सजा को 25 वर्ष की उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को 25 वर्ष की सजा पूरी होने तक किसी प्रकार की माफी या सजा में छूट का लाभ नहीं मिलेगा। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय बुढ़ार द्वारा भेजे गए डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। मुख्य आरोपित रामनारायण ढीमर को अधीनस्थ अदालत ने 13 जनवरी 2026 को मृत्युदंड सुनाया था। अभियोजन के अनुसार एक मार्च, 2023 की रात शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम छिरहटी में आरोपी ने पड़ोस की तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी।
हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्र, उसके आपराधिक इतिहास और सुधार की संभावना को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकार्ड नहीं है और 32 वर्ष की उम्र में उसके सुधार व पुनर्वास की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसलिए मामला रेयरेस्ट आफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता। मामले में आरोपी की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को अधीनस्थ अदालत द्वारा दी गई चार-चार वर्ष की सजा भी हाईकोर्ट ने निरस्त कर दोनों को बरी कर दिया।
