मुंबई, पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती ब्लेंडिंग को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। वाहन मालिकों का दावा है कि एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज प्रभावित हुआ है।
इन दिनों देखा जा रहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती ब्लेंडिंग को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में कई वाहन मालिकों का दावा है कि एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज प्रभावित हुआ है। जिसमें खासतौर पर पुराने दोपहिया वाहनों के मालिक माइलेज घटने और इंजन से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से बाइक का माइलेज और कम हो सकता है?
जिसको देखते हुए देश की प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। इसको लेकर कंपनी का मानना है कि एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल का दोपहिया वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी पर असर पड़ सकता है लेकिन तकनीकी सुधारों के कारण इसका प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एथेनॉल से माइलेज में कमी की संभावना
हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर-इंडिया आशुतोष वर्मा ने सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का समर्थन किया है। जिसमें उनका कहना है कि यह भारत की ऊर्जा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में अहम पहल है। ववहीं एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल से कम होती है। इसका मतलब है कि समान मात्रा में एथेनॉल से पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा मिलती है। इसलिए ब्लेंड में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ने पर माइलेज में कुछ अंतर आना संभव है। लेकिन ऑटो कंपनियां इंजन और वाहन तकनीक को लगातार ज्यादा एफिशिएंट बना रही हैं।
Idle Stop-Start से बच सकता है पेट्रोल
देखा गया है कि नई बाइक्स और स्कूटरों में फ्यूल बचाने वाली तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें Idle Stop-Start System खास है। ट्रैफिक में वाहन के कुछ देर रुकने पर इंजन अपने आप बंद हो जाता है और दोबारा एक्सीलेरेट करने पर चालू हो जाता है। इससे बेवजह ईंधन जलने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा लो-रोलिंग रेजिस्टेंस टायर भी फ्यूल एफिशिएंसी सुधारने में मदद करते हैं। कम रेजिस्टेंस के कारण वाहन को आगे बढ़ाने के लिए अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की जरूरत पड़ती है।
2026 में डिमांड को लेकर कंपनियों की नजर
हीरो मोटोकॉर्प ने इसको लेकर बताया है कि दोपहिया बाजार के सामने सिर्फ ईंधन से जुड़ी चुनौती नहीं है। कोरोना के बाद ग्राहकों की मांग में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला जिससे कंपनियों के लिए बिक्री का अनुमान लगाना मुश्किल रहा है। वहीं कंपनी का मानना है कि 2026 में दोपहिया बाजार का माहौल सकारात्मक है। लेकिन आगे ग्राहकों की पसंद और मांग किस तरह बदलेगी यह समझना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसी आधार पर उन्हें उत्पादन, निवेश और नई तकनीकों को लेकर रणनीति तैयार करनी होगी।
