नयी दिल्ली, 04 सितंबर (वार्ता) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में हुए बदलावों का बड़ा फायदा देश के किसानों को मिलने जा रहा है क्योंकि इसमें कृषि और संबंधित क्षेत्रों में काम आने वाले उपकरणों, उर्वरकों आदि के दाम घटाये गये हैं।
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में ट्रैक्टर, मिट्टी तैयार करने, बागवानी या वानिकी में काम आने वाली मशीनरी, कटाई या थ्रेसिंग की मशीनरी, जिसमें पुआल या चारा बेलर, घास काटने की मशीन, कम्पोस्ट मशीनरी आदि पर लगने वाली कर की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परिषद की बुधवार को 56वीं बैठक के बाद बताया कि खेती के काम में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को कम करके पांच प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया गया है। इससे ट्रैक्टर की कीमत कम हो जायेगी। यही नहीं, ट्रैक्टर के टायर और पुर्जों पर जो पहले 18 प्रतिशत टैक्स लगता था उसे भी कम करके पांच फीसदी के स्लैब में डाल दिया गया है।
जीएसटी परिषद ने खेत की तैयारी में काम आने वाले उपकरणों के साथ साथ कटाई, थ्रेसिंग के लिए मशीनों पर लगने वाले 12 प्रतिशत कर को भी पांच प्रतिशत कर दिया है। इससे कृषि, बागवानी और वानिकी में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी सस्ती हो जायेंगी।
इस बैठक में टपक सिंचाई प्रणाली और छिड़काव से होने वाली सिंचाई में काम आने वाले उपकरणों पर लगने वाला जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का फैसला किया गया। इससे किसानों की सिंचाई पर आने वाली लागत कम होगी।
जैव कीटनाशक और सू्क्ष्म पोषक तत्वों पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को कम करके पांच प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर परिषद ने मोहर लगा दी। इससे भी किसानों की लागत कम होगी और उनकी जेब पर पड़ने वाला बोझ कम हो जायेगा। इनमें बैसिलस थुरिंजिएंसिस किस्म, ट्राइकोडर्मा, नीम आधारित कीटनाशक शामिल हैं।
उर्वरक क्षेत्र को जीएसटी स्लैब परिवर्तन का बड़ा फायदा मिला है। सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, अमोनिया और सूक्ष्म पोषक तत्व पर लगने वाले कर को 18 प्रतिशत से कम करके पांच प्रतिशत कर दिया गया है।
