
सीहोर। मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है. कभी ठंड, कभी गर्मी और बीच-बीच में बारिश के कारण सीजनल फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. सर्दी-खांसी, तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. जिला चिकित्सालय सहित सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है. जिला अस्पताल की ओपीडी के आंकड़े भी हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं. बुधवार को ओपीडी में 910 मरीज पहुंचे, जबकि मंगलवार को 1209 और सोमवार को रिकॉर्ड 1396 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे. यानी तीन दिनों में ही 3515 मरीज ओपीडी में पहुंचे.
मौसम के तुनकमिजाजी के चलते अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है. लगातार बढ़ते फ्लू के मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सीएमएचओ और अस्पताल प्रबंधन को अलर्ट जारी किया है. स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों की समय पर स्क्रीनिंग और पहचान करने के निर्देश दिए हैं. गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बिना देरी किए 108 एंबुलेंस के माध्यम से हायर सेंटर रेफर करने को कहा गया है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ओपीडी में प्रतिदिन 900 से 1400 तक मरीज पहुंच रहे हैं. फिलहाल मरीजों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है. ऐसे में चिकित्सकों ने सर्दी-खांसी और बुखार से पीडि़त मरीजों में ऑक्सीजन सेचुरेशन और सायनोसिस की जांच को महत्वपूर्ण बताया है.
निमोनिया और कमजोरी की शिकायत भी बढ़ी
चिकित्सकों के अनुसार मौसमी बीमारियां इस समय तेजी से असर दिखा रही हैं. अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में जुकाम, खांसी और तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी देखी जा रही है. कई मरीजों में निमोनिया के लक्षण भी सामने आ रहे हैं. बीमारी के कारण मरीजों में अत्यधिक कमजोरी की शिकायत भी मिल रही है. खास बात यह है कि ऐसे कई मरीजों की जांच में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि नहीं हो रही है.
92 फीसदी से कम ऑक्सीजन स्तर पर खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर मरीजों की पहचान के लिए कुछ प्रमुख संकेत भी बताए हैं. मरीज का ऑक्सीजन सेचुरेशन 92 प्रतिशत से कम होने पर उसे हाइपोक्सेमिया की स्थिति माना जाएगा. इसी तरह सांस लेने की रफ्तार भी गंभीरता का संकेत है. वयस्कों में प्रति मिनट 30 से अधिक, 1 से 5 वर्ष के बच्चों में 40 से अधिक, 2 से 12 माह के शिशुओं में 50 से अधिक और 2 माह से कम उम्र के नवजात में 60 से अधिक सांस प्रति मिनट चलना गंभीर स्थिति का संकेत माना गया है.
अस्पताल में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक
सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव का कहना है कि मौसमी बीमारियों को देखते हुए जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी. कोरोना काल में ऑक्सीजन की किल्लत से सबक लेते हुए जिला अस्पताल परिसर में अलग-अलग क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे. डॉ. श्रीवास्तव के बताए अनुसार वर्तमान में सभी ऑक्सीजन प्लांट चालू हैं और जरूरत पडऩे पर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है.
