अब पछताये का होत जब चिड़िया चुन गई खेत

दमोह। गत वर्ष दमोह शहर के तत्कालीन शक्तिशाली मंत्री व दमोह शहर के विद्यायक जयंत मलैया का आश्चर्यजनक ब्यान की दमोह शहर मे भ्रष्टाचार नहीं रूक रहा है, और सरकारी कर्मचारी व पार्षद गरीबो की योजना की धनराशि खा रहे है। ऐसा नहीं चलेगा, बात कुछ समझ नहीं आयी, भैया को बहुत देर बाद पता चला कि दमोह नगर पालिका में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है, लगता है कि जब मैया मंत्री थे, जिस जमाने में वे आवास और पर्यावरण विभाग को देख रहे थे, तब से आज तक मध्यप्रदेश शासन के अनैक संपन्न विभागो में मंत्री रहे और उनके नीचे के लोग भ्रष्टाचार नहीं करते थे, मै भैया को कुछ उदाहरण बताना चाहता हूँ, जब मैया स्थानीय प्रशासन मंत्री थे, तो उनकी अधीनस्थ दमोह नगर पालिका में तत्कालीन उपयंत्री/प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी कपिल खरे के घर व विभाग और उनके सहयोगी जैन साहब के घर में इनकम टेक्स की बहुत बडी रेड (छापा) पडी थी।

मामला कपिल खरे के रिश्तेदार इनकम टेक्स मे थे, तो मामला रफा दफा हो गया पंरतु छापा तो पड़ा था, और इस छापे में कपिल खरे भैया की नाक का बाल हुआ करते थे, जब से कपिल खरे दमोह में नौकरी में आये थे, तब से आज तक दमोह में ही पदस्थ है, ऐसे ही भैया के विशेष कृपा पात्र कार्यपालन यंत्री सिंचाई पीतलिया यहां आये थे, वृहद पंचमनगर मध्यम सिचाई परियोजना का नक्शा ही परिवर्तित करके करोड़ों की राशि की हेरा फेरी कर गये और आज तक पथरिया विधान सभा क्षेत्र के अनेक ग्राम सिचाई पानी को तरस रहे है। इसी तरह सीतानगर परियोजना जो भैया के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी। वह क्षेत्र जो भैया का पूर्व विधानसभा क्षेत्र था, ग्राम कादीपुर से हिण्डोरिया तक के 21 ग्रामो में सिचाई सुविधा नहीं पहुंच पाई जबकि योजना की लागत खत्म होने की स्थिति में है। पंचम नगर परियोजना मे भारी हेराफेरी की जांच आज भी म.प्र. शासन के पास लंबित है, और तो और मैया के जमाने में बनीं नये दमोह की योजना कैसे धनराशि की हेरा फेरी हुई है, भैया को सब पता है, भैया की सरकार, मैया के लोग, जनपद पंचायत दमोह में बैठे है, मजाल है कि मैया के चहेते सरपंच का, सचिव का, जनपद पंचायत दमोह सी.ईओ. कुछ कर पाये।

पूरी जनपद मे निर्माण कार्यों में कम से कम 300 करोड रूपये की धनराशि का घपला आम चर्चा में परंतु भैया को दमोह नगर पालिका का भ्रष्टाचार दिखा कारण की म.प्र. में भा.ज.पा. की सरकार ओर दमोह नगर पालिका में कांग्रेस पक्ष की अध्यक्ष बैठी है, उन्हे यह अच्छा नहीं लग रहा कि दमोह नगर पालिका उनके रहते एक महिला चला रही है, और भैया की नहीं चल पा रहीं। तो अब भैया को दमोह में भ्रष्टाचार दिखने लगा, भैया को पता होगा कि दमोह शहर व वार्डाे की सडको के क्या हाल है, ग्रामीण क्षेत्रो की सडको के क्या हाल है। स्कूलो के कमरों के क्या हाल है। छात्र छात्राये कैसे कीचड़ भरी रोडो पर चलकर पढ़ने जाते है। अच्छा होगा कि भैया सार्वजनिक रूप से यह स्वीकारे कि मेरे पार्टीजनो ने जरूरत से ज्यादा शासन की योजनाओ मे गाला किया है। यह देखते तो आज उन्हे न कहना पड़ता कि दमोह नगर पालिका में भ्रष्टाचार व्याप्त है।

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