नयी दिल्ली , 2 अगस्त (वार्ता) डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) ने नेपाल के लिए भाषा प्रौद्योगिकियों को मजबूत करने के उद्येश्य से काठमांडू विश्वविद्यालय के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (डीपीआई-एआई) केंद्र के साथ भाषा एआई के क्षेत्र में मिल कर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की है।
डीआईसी इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का उपक्रम है। यह चर्चा काठमांडू विश्वविद्यालय में आयोजित की गयी।
मंत्रालय की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इन चर्चाओं में मौजूदा भाषा मॉडलों को मजबूत करने के साथ-साथ एआई में कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं के लिए नए मॉडल बनाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। नेपाली, नेवारी, तमांग और गुरुंग भाषाओं के साथ-साथ प्राचलित लिपि और रंजना लिपि जैसी पारंपरिक लिपियों पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि नेपाल की भाषाई विविधता को डिजिटल और एआई परितंत्र में शामिल करने के महत्व को समझा जा सके।
विज्ञप्ति के अनुसार चर्चा का एक अहम हिस्सा भाषा डेटा की चुनौती पर केंद्रित था और कहा गया कि उच्च गुणवत्ता वाले प्रतिनिधि डेटासेट बनाने के लिए विभिन्न भाषाओं, वक्ताओं और लिपियों में निरंतर संग्रह और डेटा का संरक्षण आवश्यक है। चर्चा में अनुवाद क्षमताओं को बेहतर बनाने और भाषा मॉडल को प्रशिक्षित करने, परिष्कृत करने और उनका विस्तार करने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग आवश्यकताओं को जुटाने पर भी बात हुई।
इस परियोजना में मॉडल विकास से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया में इसके उपयोग पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें वॉइस-फर्स्ट समाधानों की संभावना भी शामिल थी। इसका मुख्य उद्देश्य भाषा डेटा, मॉडल और प्रौद्योगिकी को ऐसे अनुप्रयोगों से जोड़ना था जो स्थानीय भाषाओं में सार्थक डिजिटल अनुभव प्रदान कर सकें।
