
भोपाल। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन भागों में विभाजित करने के कथित प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम संस्थान से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने की कोशिश है।
सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में डॉ. नायक ने कहा कि भाजपा सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसके पास शिक्षा के लिए कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं है, लेकिन इतिहास से दुश्मनी निभाने का एजेंडा जरूर है।
उन्होंने कहा कि आरजीपीवी के पुनर्गठन और राजीव गांधी का नाम हटाने का कोई भी प्रयास केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण से जुड़े पूर्व प्रधानमंत्री के विजन पर हमला है।
डॉ. नायक ने कहा कि राजीव गांधी ने देश में कम्प्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और तकनीकी आधुनिकीकरण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज देश में दिखाई दे रहे डिजिटल परिवर्तन की बुनियाद भी उसी दूरदर्शी सोच से जुड़ी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नई संस्थाएं स्थापित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने और शोध को मजबूत करने के बजाय मौजूदा संस्थानों के नाम बदलने में अधिक रुचि रखती है।
डॉ. नायक ने कहा, “नाम हटाने से किसी का योगदान मिटाया नहीं जा सकता। सरकारी आदेशों से इतिहास नहीं बदला जा सकता।”
उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम हटाने से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन उनके फैसलों का मूल्यांकन अंततः इतिहास और जनता करती है।
