भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द ही ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 75 लाख रजिस्टर्ड वाहन हैं, जिनमें लगभग 35 प्रतिशत यानी करीब 61 लाख वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के सड़क पर चल रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों से वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर इंश्योरेंस की वैधता जांची जाएगी। इंश्योरेंस वैध नहीं होने पर वाहन को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा।
सड़क सुरक्षा को लेकर जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले इसमें धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन शामिल थे, अब भोपाल, इंदौर और उज्जैन को भी इसमें जोड़ा गया है।
यातायात विभाग ने इस पहल को अच्छी व्यवस्था बताते हुए कहा है कि आदेश मिलते ही इसे पूरी तरह लागू करने की कोशिश की जाएगी। वहीं वाहन चालकों का भी कहना है कि सड़क दुर्घटना के समय इंश्योरेंस बेहद जरूरी होता है, इसलिए सरकार की यह पहल अच्छी है और इसे लागू किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, पेट्रोल पंप संचालकों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनका काम पेट्रोल-डीजल बेचना है, किसी ग्राहक का इंश्योरेंस, बीमा या हेलमेट चेक करना नहीं। उनके मुताबिक इस जिम्मेदारी से पंप कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम बढ़ेगा, परेशानी होगी और ग्राहकों के साथ विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
