
छतरपुर। गौरिहार तहसील के पहरा गांव में विकास के दावों के बीच मूलभूत सुविधा की कमी सामने आई है। करीब 7 से 8 हजार की आबादी वाले गांव में अब तक मुक्तिधाम की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसके चलते ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए खुले स्थान या अस्थायी इंतजाम का सहारा लेना पड़ता है।
बीते रोज मीसा बंदी और गौरिहार जनपद पंचायत के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष स्वर्गीय चंद्रभूषण त्रिपाठी ‘नन्ना’ का निधन हो गया। प्रशासन की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को किराए का टेंट लगाकर चिता सजानी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि पहरा गांव की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत जरूरत के लिए भी स्थायी व्यवस्था नहीं है। बारिश के मौसम में खुले स्थान पर अंतिम संस्कार करना और भी मुश्किल हो जाता है। लंबे समय से मुक्तिधाम की मांग किए जाने के बावजूद अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव में जल्द मुक्तिधाम का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस गांव में हजारों लोग निवास करते हैं, वहां अंतिम संस्कार के लिए स्थायी और सुविधायुक्त स्थान होना जरूरी है, ताकि किसी परिवार को विपरीत परिस्थितियों में टेंट लगाकर चिता सजाने की मजबूरी न रहे।
