रीवा: एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना क्लस्टर रीवा के अन्तर्गत कन्सेशनायर एम.एस.डब्ल्यू को कैपेक्स एवं 43 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान पर पर सवाल उठाते हुए महापौर ने नगरीय प्रशासन प्रमुख सचिव एवं निगम आयुक्त को पत्र लिखा है.जिसमें उन्होने अपने पूर्व पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि भुगतान बिना सक्षम स्वीकृति टिपिंग फीस की बढ़ोत्तरी बाहरी क्षेत्र से आ रहे कचरे का निष्पादन पहडिय़ा प्लांट में किये जाने की जांच एवं कार्यवाही किये जाने का भी उल्लेख किया है.
दरअसल 43 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान को लेकर महापौर अजय मिश्रा बाबा ने सवाल उठाते हुए बताया कि कन्सेशनायर द्वारा वर्ष 2021 से ही 100 प्रतिशत के दर से (1746 प्रति एमटी) से भुगतान लिया जा रहा है. जबकि अनुबंध अनुसार तत्समय 40 प्रतिशत के दर (698.40 रू.) से भुगतान होना था. विगत 4 वर्षों (2021 से 2025 तक) में लगभग 4,10,000 एमटी कचरे पर इस प्रकार लगभग रु. 42,95,16,000/- (बयालीस करोड़ पंचानवे लाख) का अतिरिक्त भुगतान फर्जी एवं कूटरचित तरीके से तत्कालीन इंडिपेंटेंड इंजीनियर को शामिल कर प्राप्त किया जा चुका है.
उक्त भुगतान की अनियमितता को तात्कालिक आयुक्त श्रीमती संस्कृति जैन द्वारा स्वीकार भी किया गया था. साथ ही पहाडिय़ा स्थित प्लांट में शहर के कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है, कचरे का पहाड़ बन गया है, ग्रामीणों का जीवन तबाह हो रहा है. महापौर ने पत्र में उल्लेख करते हुए बताया कि तत्कालीन आयुक्त डा. सौरभ संजय सोनवणे द्वारा टिपिंग फीस की बढ़ोत्तरी भी बिना एमआईसी या शासन से समक्ष स्वीकृति प्राप्त किये 1746 प्रति एमटी से बढ़ा कर 2747 रूपये प्रति एमटी मानिटरिंग कमेटी की बैठक 31.07.25 के प्रस्ताव क्रमांक 5 में इंडिपेंडेंट इंजीनियर की टीप को आधार मान कर दर वृद्धि की गई. नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है. महापौर ने अनुबंधन के खिलाफ अतिरिक्त भुगतान की जांच व कार्यवाही की मांग की है.
