इंदौर: नगर निगम शहर में दुकानों के लाइसेंस बनाने कार्य में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इसके तहत अब क्षेत्रवार झोनल कार्यालयों पर दुकानों के लाइसेंस बनाए जाएंगे. इसकी जिम्मेदारी निगम राजस्व बिल कलेक्टरों को सौंपी जाएगी. खास बात यह है कि शहर में दुकानों लाइसेंस बनाने के लिए 15 सितंबर से मुहिम चलाई जाएगी.
नगर निगम द्वारा पिछले महीने सभी झोनल कार्यालयों पर जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था शुरू की गई है. इसी कड़ी में निगम अब दुकानों के लाइसेंस बनाने की व्यवस्था भी झोनल कार्यालयों पर शुरू करने जा रहा है.
इसके लिए नगर निगम मार्केट विभाग को राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत बिल कलेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. एक अनुमान के अनुसार शहर में करीब डेढ़ लाख दुकानें है और निगम लाइसेंस सिर्फ 20 प्रतिशत के आसपास ही बन रहे है. इस कारण नगर निगम मार्केट विभाग को करोड़ों रुपए की हानि हो रही है. दुकानदार भी लाइसेंस बनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं. इसको देखते हुए नगर निगम ने सभी झोनल कार्यालयों पर लाइसेंस बनाने की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि नगर निगम में 85 वार्डों में 85 बिल कलेक्टर है, जो निगम करों की वसूली करते हैं. नगर निगम मार्केट विभाग में सिर्फ 6 लाइसेंस इंस्पेक्टर ही बचे है. पहले 20 अधिकारी थे, तो शहर में काम हो जाता था. स्टॉफ की कमी के चलते नगर निगम राजस्व विभाग द्वारा मार्केट विभाग की वसूली बढ़ाने के लिए उक्त निर्णय लिया है.
साफ्टवेयर का काम किया जा रहा
अपर आयुक्त आकाशसिंह ने कहा कि 12 तारीख की लोक अदालत है. इसके बाद शहर में दुकानदारों के खिलाफ निगम लाइसेंस बनाने के मुहिम चलाई जाएगी. निगम के सभी झोनल कार्यालयों पर कंप्यूटर में लाइसेंस बनाने के सॉफ्टवेयर का काम किया जा रहा है, ताकि व्यापारियों को अपने अपने क्षेत्र में ही लाइसेंस बनाने की सुविधा मिल जाएगी
