नई दिल्ली। एस्सेल ग्रुप से जुड़े करीब 22,006 करोड़ के स्वीकृत दावों के मामले में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। नई दिल्ली में गठित एनसीएलटी की पांच सदस्यीय नई खंडपीठ ने एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की ओर से प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना पर रोक लगा दी।
खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में पहले गठित तीन सदस्यीय पीठ के सदस्यों के बीच न तो बहुमत बन पाया था और न ही किसी एक निष्कर्ष पर सहमति बनी थी। ऐसे में उस फैसले को लागू नहीं किया जा सकता।
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब 25 अगस्त के फैसले में 22 हजार करोड़ से अधिक के स्वीकृत दावों के मुकाबले चंद्रा की ओर से महज 6.5 करोड़ के भुगतान की बात सामने आई थी। इससे लगभग 99.9 फीसदी हेयरकट का संकेत मिलता था।
हालांकि, फैसले के बाद सुभाष चंद्रा और एनसीएलटी से जुड़े सूत्रों की ओर से स्पष्ट किया गया था कि 6.5 करोड़ को पूरी पुनर्भुगतान राशि के तौर पर देखना सही नहीं है। इसके बाद मंगलवार का नया आदेश मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
