
नयी दिल्ली 01 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बदलने और बच्चों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री जोशी ने आज यहां एनसीईआरटी मुख्यालय में परिषद के 66वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छह दशकों से अधिक समय से एनसीईआरटी अपनी पाठ्यपुस्तकों, शिक्षण सामग्री और पाठ्यचर्या ढांचे के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने समग्र विकास, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, अनुभवात्मक शिक्षा और दक्षता आधारित शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए व्यापक रूपरेखा दी है। इसी दिशा में एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-फाउंडेशनल स्टेज (एनसीएफ-एफएस) 2022, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-स्कूली शिक्षा (एनसीएफ-एसई) 2023 और कक्षा 1 से 9 तक नयी पाठ्यपुस्तकों के विकास में महत्वपूर्ण काम किया है। उन्होंने बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा विभिन्न भारतीय भाषाओं में 121 प्राइमर तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें 93 जनजातीय भाषाएं शामिल हैं।
श्री जोशी ने एनसीईआरटी के अनुसंधान तंत्र को और मजबूत करने तथा शिक्षा में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विद्यार्थियों में डिजिटल साक्षरता, एआई की समझ, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और नवाचार जैसे कौशल विकसित करना जरूरी है। साथ ही विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने पाठ्यचर्या संबंधी पहल, मनोसामाजिक सहयोग और शिक्षकों के प्रशिक्षण को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मंत्री ने रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर, ट्रांसलेशन लैब और उन्नत टेलीविजन स्टूडियो का उद्घाटन करते हुए कहा कि ये सुविधाएं तकनीक आधारित शिक्षा, भारतीय भाषाओं में शिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री के विकास को बढ़ावा देंगी।
