विजय शर्मा
भोपाल: प्रदेश सरकार के द्वारा गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए पीएम आवास योजना के तहत अनेकों मकान बनाए जा चुके है. वहीं वर्तमान में भी लगभग 18 प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है जो शहर के अलग अलग क्षेत्रों जारी है. इन प्रोजक्टों में से अधिकतर के लिए पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं ली गई है. यह सभी प्रोजेक्टों वर्ष 2022 से निर्माण मंजूरी को लेकर सवालों के घेरे में हैं. हाउसिंग फॉर ऑल योजना के तहत नगर निगम केवल राहुल नगर प्रोजेक्ट में पर्यावरण परमिशन लिए जाने की जानकारी मिली है.
-20 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण पर अनुमति है जरुरी
नगर निगम ने पर्यावरण को लेकर कभी गंभीरता नहीं दिखाई. उनका यह सोचना रहा कि सरकारी निर्माण है इसमें पर्यावरणीय अनुमति लेने में छूट रहती है. जिस वजह से कई पीएम आवास योजना के साथ अन्य आवासीय प्रोजेक्ट में निर्माण के दौरान पर्यावरणीय अनुमति नहीं ली गई. जबकि नियमों के अनुसार 20 हजार वर्गफीट या उससे अधिक के आवासीय निर्माण पर पर्यावरणीय अनुमति आवश्यक होती है. इन बिना पर्यावरण विभाग की अनुमति के प्रोजेक्टों पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
पर्यावरणीय अनुमति के लिए प्रक्रिया जारी
नगर निगम को आवासीय भवनों के निर्माण से पहले ही पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना थी लेकिन इन्होंने यह प्रकिया क्यों नहीं अपनाई. लेकिन जब अधिकारियों की अन कमियों की जानकारी मिली है तो निगम के द्वारा अब पर्यावरण विभाग को अनुमति के लिए आवेदन किये गए हैं. जो जल्द ही मिलने की संभावना है.
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कार्रवाई हुई तो कौन होगा दोषी
पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए मकानों में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं. ऐसे में पर्यावरणीय मंजूरी का मामला केवल निगम और निर्माण एजेंसी तक सीमित नहीं है. यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कार्रवाई से पहले यह तय करना होगा कि गलती किस स्तर पर हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी है.
इनका कहना है.
वर्ष 2022 में में प्रोजेक्ट शुरू हुए थे, कुछ में परमिशन है जिनमें नहीं है वह परमिशन के लिए भेज दिये गए हैं
तन्मय वशिष्ठ शर्मा, आईएएस अपर आयुक्त , नगर निगम
