केरल अक्टूबर तक पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देगा-विष्णुनाथ

तिरुवनंतपुरम, 29 अगस्त (वार्ता) केरल के पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा मंत्री पी. सी. विष्णुनाध ने कहा है कि राज्य सरकार अक्टूबर तक प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को ‘उद्योग’ का दर्जा देगी।

श्री विष्णुनाथ ने प्रदेश की राजधानी में चल रहे ओणम पर्यटन सप्ताह समारोह के मुख्य स्थल कनककुन्नु पैलेस के दौरे के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने का मसौदा प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बातचीत चल रही है।

उन्होंने कहा कि इस कदम से पर्यटन क्षेत्र को बैंक सब्सिडी और एकल खिड़की प्रणाली जैसे फ़ायदे मिलने की उम्मीद है, साथ ही इससे केरल को देश और विदेश से बड़े निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि कोझिकोड में अकालापुझा जहाँ पहले से ही लगभग 40 हाउस-बोट चल रही हैं, को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित और औपचारिक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा, हालाँकि इसे अभी तक आधिकारिक तौर पर ऐसा दर्जा नहीं मिला है। कोल्लम में मुनरो आइलैंड को भी एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के तौर पर पेश किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि यह गतव्य बेहतर मार्केटिंग का हकदार है और इसमें मालदीव के बराबर पर्यटन की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि केरल के हर ज़िले में कम प्रसिद्ध स्थल हैं जिन्हें विकसित और बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे राज्य भर में पर्यटन गतिविधियों को समान रूप से फैलाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार सालाना पर्यटक कैलेंडर में सभी प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शामिल करके सांस्कृतिक पर्यटन का विस्तार करने की भी योजना बना रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर अपनी यात्रा की योजना बना सकें।

श्री विष्णुनाथ ने कहा, “हम सालाना पर्यटन कैलेंडर में सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शामिल करेंगे ताकि दुनिया भर के पर्यटक केरल की अनोखी, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का आनंद ले सकें।”

उन्होंने कहा, “केरल सिर्फ घूमने-फिरने की जगह नहीं है; यह एक ऐसी जगह है जिसे महसूस करना और जिसका आनंद लेना चाहिए।” वे पर्यटन विभाग के नए अभियान ‘एक दिन के लिए मलयाली बनें’ का ज़िक्र कर रहे थे, जिसका मकसद ऐसे विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है जो अनुभव-आधारित पर्यटन की तलाश में हैं।

मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केरल को आयुर्वेद के असली घर के तौर पर स्थापित किया जाए, क्योंकि श्रीलंका समेत कई अन्य जगहें भी आयुर्वेद को अपने पर्यटन के हिस्से के तौर पर बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “प्राकृतिक सुंदरता के मामले में कोई भी हमारा मुकाबला नहीं कर सकता।” उन्होंने चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन को मज़बूत करने में केरल की प्राकृतिक खूबियों पर रोशनी डाली।

 

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