राखी की एक डोर, 29 से ज्यादा रिश्तेः चार पीढ़ियों का अनोखा मिलन

इंदौर: रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों को सहेजने और परिवार को एक सूत्र में बांधने का अवसर भी है. बदलते दौर में जहां संयुक्त परिवार छोटे होते जा रहे हैं, वहीं इंदौर का एक परिवार आज भी रिश्तों की इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए है. रक्षाबंधन पर परिवार के 29 से अधिक सदस्य और चार पीढ़ियां एक ही जाजम पर बैठकर पर्व मनाती हैं.

परिवार में बुआ, मामा, भाई-बहन, चाचा-चाची, भांजे-भांजी, बेटियां और दामाद सहित 18 से अधिक बुआ-मामा परिवार के सदस्य शामिल होते हैं. बहनें सालभर इस दिन का इंतजार करती हैं, ताकि भाइयों को राखी बांधने के साथ पूरा परिवार एक साथ मिल सके. राखी बांधने के बाद सभी सदस्य साथ भोजन करते हैं और पुरानी यादें साझा करते हैं. परिवार के 78 वर्षीय बुजुर्ग विजय बलवा कहते हैं कि आज जहां लोग छोटे परिवारों तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं उनके परिवार की चार पीढ़ियां एक साथ त्योहार मनाती हैं.

उनके अनुसार, परिवार का साथ ही सबसे बड़ी खुशी और असली पूंजी है.परिवार की यह परंपरा नई पीढ़ी के लिए भी मिसाल है. उनका मानना है कि त्योहार केवल रस्में निभाने के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने के लिए होते हैं. रक्षाबंधन की राखी उनके लिए सिर्फ भाई-बहन का बंधन नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रेम, विश्वास और अपनत्व से जोड़ने वाली डोर है.

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