
मंदसौर। शिवना नदी के पावन तट पर विराजित भगवान श्री अष्टमुखी पशुपतिनाथ महादेव के मंदिर में रक्षा बंधन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ को विधि-विधान से रक्षा सूत्र की राखी अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने महादेव के दर्शन कर परिवार, समाज और समस्त जनमानस की सुख-शांति, समृद्धि एवं सुरक्षा की कामना की।
मंदसौर की धार्मिक पहचान बने श्री पशुपतिनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित विशाल अष्टमुखी शिवलिंग है। लगभग 4.6 टन (46 क्विंटल) वजनी और करीब 3.5 मीटर ऊंचे इस शिवलिंग पर भगवान शिव के आठ मुख दो स्तरों में अंकित हैं। ऊपरी और निचले भाग में चार-चार मुख भगवान शिव के विविध स्वरूपों का दर्शन कराते हैं।
पर्यटन विभाग के आधिकारिक विवरण के अनुसार इन आठ मुखों को भाव, पशुपति, महादेव, ईशान, रुद्र, शर्व, उग्र और अशनी स्वरूपों से जोड़ा गया है। ये स्वरूप शिव की सृजनात्मक शक्ति, ज्ञान, चेतना, संरक्षण, सर्वव्यापकता और परिवर्तनकारी शक्ति के विविध आयामों का प्रतीक माने जाते हैं। यही अष्टमुखी स्वरूप पशुपतिनाथ मंदिर को देश के विशिष्ट शिव मंदिरों में अलग पहचान देता है।
हर मुख पर तीसरा नेत्र
अष्टमुखी पशुपतिनाथ की प्रतिमा की एक और विशिष्टता प्रत्येक मुख पर अंकित तीसरा नेत्र है। सनातन परंपरा में शिव का तीसरा नेत्र दिव्य दृष्टि, ज्ञान, चेतना और सत्य का प्रतीक माना जाता है। आठों मुखों का यह अद्भुत संयोजन भगवान शिव के विराट और बहुआयामी स्वरूप का साक्षात्कार कराता है।
शिवना का प्राकृतिक जलाभिषेक
पशुपतिनाथ मंदिर और शिवना नदी का संबंध भी श्रद्धालुओं की आस्था से गहराई से जुड़ा है। वर्षा ऋतु में शिवना का जलस्तर बढ़ने पर जब नदी का पानी मंदिर परिसर तक पहुंचता है, तो श्रद्धालु इसे भगवान पशुपतिनाथ का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं। मानसून में दिखाई देने वाला यह दृश्य मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है।
मंदिर परिसर में भगवान हनुमान एवं श्री जानकीनाथ के देवालय भी स्थित हैं। शिवना तट पर विकसित यह धार्मिक परिसर मंदसौर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है।
रक्षा बंधन पर मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। राखी अर्पित कर भक्तों ने भगवान पशुपतिनाथ से परिवार एवं समाज की रक्षा, सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की।
