महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
महाकौशल की सबसे बड़ी नगर निगम जबलपुर के गलियारों में इन दिनों अफसरशाही के खूब चर्चे हो रहे हैं। इस बार मामला प्रमोशन से जुड़ा है, जिसमें दोहरा रवैया अपनाए जाने का आरोप वरिष्ठ अधिकारियों पर लग रहा है। दरअसल नगर निगम के तकरीबन आधा सैकड़ा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे हैं। निगम आयुक्त और महापौर से मुलाकात कर इन कर्मचारियों ने अपनी वेदना से उन्हें अवगत भी कराया था। इसके उपरांत महापौर जगत बहादुर सिंह तथा निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार की रजामंदी से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई, इससे कर्मचारी गदगद हो गए लेकिन उनकी यह खुशी अब काफूर हो गई है। इसकी जो वजह सामने आ रही है वह यह है कि कर्मचारियों की पदोन्नति संबंधी फाइल बन तो गई हैं लेकिन वह टेबिल दर टेबिल घूम रही हैं, उसमें शीर्ष अफसर के हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारी अपने विभाग प्रमुख से पूछताछ कर रहे हैं, मगर वह भी यह नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर फाइल अटकी कहां पर हैं।
इससे इतर दूसरा परिदृश्य यह है कि पदोन्नति के आकांक्षी अधिकारियों की फाइल न केवल तेजी से आगे बढ़ रही हैं बल्कि उनमें साइन भी धड़ाधड़ हो रहे हैं। इस माजरे से क्षुब्ध चतुर्थ श्रेणी कर्मी अपनी समस्या जनप्रतिनिधियों के समक्ष भी रख चुके हैं परंतु वहां से भी कोई ठोस नतीजा उन्हें नहीं मिल सका। विदित रहे कि वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की लड़ाई न्यायालय में भी विचाराधीन है जिसकी सुनवाई सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाली है। इसके चलते कर्मचारियों के बीच चिंता है कि यदि किसी वजह से न्यायालय ने दोबारा रोक लगा दी तो उन्हें फिर सालों तक प्रमोशन मिलने का इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल नगर निगम के विभिन्न विभागों में आम जनों से संबंधित कामकाज से ज्यादा पदोन्नति सूची तैयार करने और इससे संबंधित फाइलों की खोजबीन ज्यादा हो रही है।
भोपाल को तवज्जो, मुख्यालय की उपेक्षा
प्रदेश का बिजली मुख्यालय शक्ति भवन जबलपुर में है किंतु इसको नियंत्रित भोपाल से किया जाता है, और इसी वजह से जबलपुर को दोयम दर्जे का बर्ताव झेलना पड़ रहा है। महाकौशल के केंद्र बिंदु होने के बावजूद जबलपुर के प्रत्येक क्षेत्र में रोजाना घंटों बिजली गुल होने की समस्या अनवरत बनी हुई है। इन हालातों के बीच भोपाल के औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में 400 केवी फोर स्टेज जीआईएस सब स्टेशन स्थापना की तैयारी की चर्चा शक्ति भवन की गलियारों में गूंज रही है, जबकि जबलपुर की बढ़ती विद्युत जरूरत के मद्देनजर नए ट्रांसमिशन स्रोत तैयार करने के कई प्रस्ताव वर्षों से फाइलों की कैद से बाहर ही नहीं आ पा रहे हैं।
संस्कारधानी के विजयनगर क्षेत्र के बढ़ते दायरे के मद्देनजर वर्ष 2019 में 132 केवी सब स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, परंतु जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण यह प्रस्ताव आज तक आगे नहीं बढ़ सका है। घनी आबादी वाले क्षेत्र बिजली आपूर्ति आज भी पूरी तरह से उखरी सब स्टेशन पर ही निर्भर बनी हुई है। वह भी चार दशक पुरानी व्यवस्था व विनोबा भावे सब स्टेशन तथा नयागांव सब स्टेशन से आने वाले सर्किटों पर टिकी है। इसी प्रकार विनोबा भावे से गोरा बाजार तक जाने वाले 33 केवी सर्किट को आधुनिक और उच्च क्षमता वाली लाइन में परिवर्तित करने का प्रस्ताव भी लंबे समय से प्रतीक्षा में है, जो अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है।
पिछले लगभग 15 वर्षों में जबलपुर शहर के लिए किसी भी नए एक्स्ट्रा हाईटेंशन सब स्टेशन की गंभीर जरूरत पर अपेक्षित स्तर पर कार्य नहीं हो पाया है। पुरानी ट्रांसमिशन व्यवस्था पर लगातार बढ़ रहा यह दबाव बिजली आपूर्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।फिलहाल बिजली वितरण कंपनी का मुख्य जोर राजस्व वसूली, स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली चोरी रोकने जैसे कार्यों पर अधिक है, जबकि जबलपुर वासी रोज हो रहे फाल्ट की समस्या झेलने के लिए मजबूर हैं।
