नई दिल्ली, लगातार चार से पांच रातों तक नाइट ड्यूटी करने वाले लोको पायलटों का स्लीप रूटीन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दिन में सोने के कारण शरीर को सुकून भरी नींद नहीं मिल पाती, जिससे अत्यधिक थकान, सिर में भारीपन और मानसिक तनाव जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं।
क्रू मैनेजमेंट सिस्टम में तकनीकी खामी
यूनियन के सदस्यों के अनुसार, क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक ही नाइट ड्यूटी गिनता है, जबकि रेलवे नियमों के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे का समय ‘रात’ माना जाता है। इस समयावधि के अंतर के कारण लोको पायलटों को उनके कानूनी अधिकारों और भत्तों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रेलवे सुरक्षा और बोर्ड से मांग
खराब वर्किंग कंडीशंस और लगातार नाइट ड्यूटी से पायलटों की सतर्कता पर असर पड़ रहा है, जो रेल सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है। स्टाफ ने रेलवे बोर्ड से मांग की है कि सीएमएस सॉफ्टवेयर और नाइट ड्यूटी की गिनती के नियमों में जल्द सुधार किया जाए।

